‘Pushing the Frontier of AI in India’ शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने भारत मंडपम में ‘भारत में एआई की सीमाओं को आगे बढ़ाना’ सत्र में भाग लिया। जानें कैसे डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर और उद्योग सहयोग से भारतीय शिक्षा व्यवस्था में एआई (AI) क्रांति आने वाली है।
शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने भारत मंडपम में ‘Pushing the Frontier of AI in India’ सत्र में भाग लिया। भारत अब शिक्षा में एआई को विज़न से वास्तविकता में बदल रहा है।
नई दिल्ली: भविष्य की शिक्षा का रोडमैप
नई दिल्ली, 17 फरवरी: भारत की शिक्षा व्यवस्था को आधुनिक और तकनीक-संपन्न बनाने की दिशा में आज एक और बड़ा कदम उठाया गया। केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने आज नई दिल्ली के प्रतिष्ठित ‘भारत मंडपम’ में आयोजित ‘पुशिंग द फ्रंटियर ऑफ एआई इन इंडिया’ (Pushing the Frontier of AI in India) सत्र में शिरकत की।
इस सत्र का मुख्य उद्देश्य भारत में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) को केवल एक नीतिगत विचार तक सीमित न रखकर, उसे जमीनी स्तर पर बड़े पैमाने पर लागू करने की रणनीति साझा करना था।

नीति से कार्यान्वयन तक का सफर
सत्र के दौरान शिक्षा मंत्री ने इस बात पर जोर दिया कि भारत अब एआई के क्षेत्र में केवल ‘विज़न’ (दृष्टिकोण) रखने वाला देश नहीं रहा, बल्कि अब हम इसे ‘इम्प्लीमेंटेशन’ (कार्यान्वयन) के स्तर पर ले जा रहे हैं। उन्होंने रेखांकित किया कि कैसे सार्वजनिक डिजिटल बुनियादी ढांचे (Public Digital Infrastructure) का उपयोग करके देश के कोने-कोने तक आधुनिक शिक्षा पहुँचाई जा सकती है।
‘Pushing the Frontier of AI in India’ सत्र की मुख्य विशेषताएं:
शिक्षा मंत्री ने एआई को शिक्षा के साथ जोड़ने के लिए पाँच प्रमुख स्तंभों पर ध्यान केंद्रित किया:
- सेंटर्स ऑफ एक्सीलेंस (CoE): देश के प्रमुख संस्थानों में एआई के लिए समर्पित केंद्र स्थापित किए जा रहे हैं ताकि नवाचार को बढ़ावा मिले।
- शिक्षक प्रशिक्षण कार्यक्रम: केवल तकनीक लाना पर्याप्त नहीं है; शिक्षकों को एआई उपकरणों के उपयोग में कुशल बनाने के लिए व्यापक प्रशिक्षण कार्यक्रम चलाए जा रहे हैं।
- पाठ्यक्रम एकीकरण (Curriculum Integration): स्कूली और उच्च शिक्षा के पाठ्यक्रम में एआई को इस तरह शामिल किया जा रहा है कि छात्र भविष्य की चुनौतियों के लिए तैयार रहें।
- सार्वजनिक डिजिटल बुनियादी ढाँचा: भारत के मजबूत डिजिटल इकोसिस्टम का लाभ उठाकर एआई को सुलभ बनाया जा रहा है।
- उद्योग और स्टार्टअप सहयोग: शिक्षा मंत्रालय उद्योगों और नए स्टार्टअप्स के साथ मिलकर काम कर रहा है ताकि शिक्षा में व्यावहारिक और नवीन समाधान लाए जा सकें।
एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर
यह आयोजन शिक्षा मंत्रालय के उन निरंतर प्रयासों का हिस्सा है, जिसके तहत एआई की परिवर्तनकारी क्षमता का लाभ उठाने की कोशिश की जा रही है। मंत्री ने कहा कि भारत का लक्ष्य न केवल एआई का उपभोक्ता बनना है, बल्कि दुनिया के लिए एआई आधारित समाधानों का निर्माता बनना भी है।
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