होलिका दहन 2026: भूलकर भी न जलाएं इन पेड़ों की लकड़ियां, माना जाता है घोर अशुभ; जानें दहन के लिए सबसे शुभ पेड़ कौन से हैं | Holika Dahan Shubh Ashubh Lakdi
Holika Dahan Shubh Ashubh Lakdi होलिका दहन पर शास्त्रों के अनुसार कुछ पेड़ों की लकड़ियां जलाना वर्जित है। जानें कौन सी लकड़ी जलाने से घर में आती है दरिद्रता और किन लकड़ियों के प्रयोग से मिलता है पुण्य लाभ।
क्या आप जानते हैं कि होलिका दहन में हर लकड़ी का प्रयोग नहीं किया जा सकता? कुछ पेड़ों को काटना या जलाना शास्त्रों में वर्जित बताया गया है। इस होली, सही परंपरा का पालन करें। पूरी जानकारी के लिए पढ़ें!

होलिका दहन में लकड़ियों का धार्मिक और वैज्ञानिक महत्व

बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक
फाल्गुन मास की पूर्णिमा को मनाया जाने वाला होलिका दहन का पर्व हिंदू धर्म में विशेष स्थान रखता है। यह पर्व न केवल भक्त प्रहलाद की रक्षा और होलिका के अंत की कथा कहता है, बल्कि यह प्रकृति के प्रति हमारी जिम्मेदारी को भी दर्शाता है। अक्सर लोग अनजाने में किसी भी पेड़ की लकड़ी होलिका में डाल देते हैं, लेकिन ज्योतिष और शास्त्रों के अनुसार, कुछ विशेष पेड़ों की लकड़ियों को जलाना ‘समिधा’ के नियमों के विरुद्ध और अशुभ माना गया है।
इन लकड़ियों को जलाना माना गया है ‘अशुभ’ (Inauspicious Woods)
शास्त्रों में कुछ वृक्षों को पूजनीय और देवी-देवताओं का वास माना गया है। होलिका दहन में इनका प्रयोग वर्जित है: Holika Dahan Shubh Ashubh Lakdi
- पीपल (Peepal): पीपल को ‘वृक्षराज’ कहा जाता है और इसमें भगवान विष्णु का वास माना जाता है। इसे काटना या इसकी जीवित टहनियों को जलाना पाप माना जाता है।
- बरगद (Banyan): बरगद को अक्षय वट कहा जाता है और यह दीर्घायु व त्रिमूर्ति का प्रतीक है। होलिका में इसकी लकड़ी का उपयोग वर्जित है।
- नीम (Neem): नीम का वृक्ष मां दुर्गा और शीतला देवी से संबंधित माना जाता है। हालांकि इसके औषधीय गुण हैं, लेकिन पवित्र अग्नि में इसकी गीली या जीवित लकड़ी डालना उचित नहीं माना गया।
- आम (Mango): सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि हरे भरे आम के पेड़ की लकड़ी कभी नहीं जलानी चाहिए। आम की लकड़ी का प्रयोग केवल हवन कुंड में विशेष विधि से होता है, लेकिन होलिका की भीषण अग्नि में इसे नष्ट करना अशुभ माना जाता है।
- शमी (Shami): शमी का वृक्ष शनि देव और भगवान राम से जुड़ा है। इसकी पूजा की जाती है, इसे जलाना घर में क्लेश पैदा कर सकता है।
- फलदार वृक्ष: ऐसे पेड़ जो वर्तमान में फल दे रहे हों, उन्हें काटना या जलाना संतान पक्ष के लिए कष्टकारी माना गया है।

किन लकड़ियों से करें होलिका दहन? (Auspicious Woods)
होलिका दहन के लिए शास्त्रों ने विकल्प भी दिए हैं, जो पर्यावरण और आध्यात्म दोनों के अनुकूल हैं: Holika Dahan Shubh Ashubh Lakdi
- गूलर की सूखी लकड़ियां: होलिका दहन के लिए गूलर की सूखी लकड़ियों का उपयोग सबसे श्रेष्ठ माना गया है। इस समय गूलर के पेड़ से टहनियां प्राकृतिक रूप से गिरती हैं।
- अरंडी का पेड़ (Castor Plant): परंपरा के अनुसार, होलिका के बीच में अरंडी का डंडा गाड़ा जाता है। यह बुराई को सोखने का प्रतीक माना जाता है।
- गोबर के उपले (Badkulya): सबसे शुभ और वैज्ञानिक रूप से लाभकारी विकल्प गाय के गोबर से बने उपले या ‘बड़कुल्ले’ हैं। इन्हें जलाने से वातावरण शुद्ध होता है और प्रदूषण कम होता है।
- सूखी घास और खरपतवार: खेत-खलिहानों में जमा सूखी घास और बेकार लकड़ियों को जलाना सबसे उत्तम है ताकि किसी जीवित वृक्ष को नुकसान न पहुंचे।

होलिका दहन का वैज्ञानिक दृष्टिकोण
प्राचीन काल में होलिका दहन का उद्देश्य केवल धार्मिक नहीं था। वसंत ऋतु के आगमन पर वातावरण में बैक्टीरिया और कीटाणुओं की वृद्धि होती है। जब होलिका में गाय के उपले, कपूर, और सूखी लकड़ियां जलाई जाती हैं, तो उससे निकलने वाला धुआं आसपास के वातावरण को सैनिटाइज करता है और बीमारियों को फैलने से रोकता है।
कैसे करें पर्यावरण के अनुकूल होलिका दहन?
Holika Dahan Shubh Ashubh Lakdi आज के समय में जब प्रदूषण एक बड़ी समस्या है, हमें ‘ग्रीन होली’ की ओर बढ़ना चाहिए।
- पेड़ों को काटने के बजाय केवल सूखी लकड़ियों का संचय करें।
- अधिक से अधिक गोबर के उपलों का प्रयोग करें।
- प्लास्टिक, टायर या केमिकल वाली चीजें आग में न डालें।
Table of Contents
इस होली घर पर बनाएं ये 5 टेस्टी और आसान मिठाइयां, मेहमान भी पूछेंगे रेसिपी! Holi Recipes
शोर्ट वीडियोज देखने के लिए VR लाइव से जुड़िये
हमारे फेसबुक पेज से जुड़ने के लिए इस लींक पर क्लीक कीजिए VR LIVE
Holashtak 2026 Warnings 23 फरवरी से शुरू हो रहा है होलाष्टक, 9 दिनों तक शुभ कार्यों पर लगेगा ब्रेक

