Sunday, March 1, 2026
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Eye Floaters: क्या आपको भी अपनी आंखों के सामने काली लाइनें या जाले तैरते नजर आते हैं? आंखों के सामने तैरती काली रेखाएं क्या हैं?

Eye Floaters: क्या आपको भी अपनी आंखों के सामने काली लाइनें या जाले तैरते नजर आते हैं? आंखों के सामने तैरती काली रेखाएं क्या हैं?

Eye Floaters: क्या आपकी आंखों के सामने भी काली लाइनें या धब्बे तैरते नजर आते हैं? जानिए क्या है ‘आई फ्लोटर्स’, इसके कारण, लक्षण और कब यह एक गंभीर बीमारी का संकेत हो सकता है। आंखों के सामने तैरने वाले काले धब्बे क्या हैं? क्या यह अंधेपन का संकेत है या सिर्फ बढ़ती उम्र का असर?

Eye Floaters: आंखों के सामने काली रेखाएं: क्या यह किसी गंभीर बीमारी का संकेत है?

अक्सर दीवार की तरफ देखते हुए या साफ आसमान की ओर देखते समय हमें अपनी आंखों के सामने कुछ तैरती हुई आकृतियां नजर आती हैं। कभी ये काले धब्बे होते हैं, तो कभी धागे जैसी बारीक लाइनें। जैसे ही हम उन्हें गौर से देखने की कोशिश करते हैं, वे हमारी नजरों से दूर भाग जाती हैं। चिकित्सा विज्ञान में इस स्थिति को ‘मस्काई वॉलिटेंट्स’ (Muscae Volitantes) या सामान्य भाषा में ‘आई फ्लोटर्स’ कहा जाता है।

आमतौर पर आई फ्लोटर्स (Eye Floatters) को उनके आकार और उत्पत्ति के आधार पर मुख्य रूप से तीन प्रकारों में बांटा जा सकता है: पहले वे जो रेशेदार या धागे जैसे (Fibrous strands) होते हैं, जो उम्र बढ़ने के साथ विट्रियस जेली के सिकुड़ने से बनते हैं और मकड़ी के जाले की तरह दिखते हैं; दूसरे डिफ्यूज या धूल के कण जैसे (Diffuse floaters), जो छोटे-छोटे काले धब्बों के रूप में नजर आते हैं और अक्सर सूक्ष्म जमाव (clumping) के कारण होते हैं; और तीसरे ‘Weiss Ring’ फ्लोटर्स, जो एक बड़े छल्ले या ‘O’ आकार के होते हैं और तब बनते हैं जब विट्रियस जेली ऑप्टिक नर्व के पास से पूरी तरह अलग हो जाती है। इसके अलावा, कुछ फ्लोटर्स आंख के अंदर सूजन या रक्तस्राव के कारण लाल या गहरे काले बिंदुओं के रूप में भी दिखाई दे सकते हैं, जिन्हें गंभीरता से लेना चाहिए।

ये काले धब्बे असल में क्या हैं?

हमारी आंख के अंदर एक जेली जैसा पदार्थ होता है जिसे विट्रियस ह्यूमर (Vitreous Humour) कहते हैं। यह हमारी आंख के आकार को बनाए रखता है। उम्र बढ़ने के साथ या कुछ अन्य कारणों से, यह जेली थोड़ी पतली होने लगती है और इसमें मौजूद कोलेजन के रेशे आपस में गुच्छे बना लेते हैं।

जब ये रेशे या गुच्छे आपकी आंख के रेटिना (जहां फोटो बनती है) के सामने से गुजरते हैं, तो उनकी परछाई रेटिना पर पड़ती है। यही परछाई आपको काली लाइनों या धब्बों के रूप में दिखाई देती है।

आई फ्लोटर्स होने के मुख्य कारण

Eye Floaters
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  • बढ़ती उम्र: 50 साल से अधिक उम्र के लोगों में यह बहुत सामान्य है क्योंकि विट्रियस जेली सिकुड़ने लगती है।
  • निकट दृष्टि दोष (Myopia): जिन लोगों को दूर का धुंधला दिखता है (माइनस नंबर का चश्मा), उन्हें फ्लोटर्स होने की संभावना ज्यादा होती है।
  • आंख में सूजन: आंख के पिछले हिस्से में सूजन (Uveitis) के कारण भी ये कण दिख सकते हैं।
  • मधुमेह (Diabetes): शुगर के मरीजों में रेटिना से जुड़ी समस्याओं के कारण खून की सूक्ष्म बूंदें फ्लोटर्स की तरह दिख सकती हैं।
  • आंख में चोट: किसी चोट के कारण विट्रियस जेली का संतुलन बिगड़ सकता है।
Eye Floaters
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क्या यह कोई गंभीर बीमारी है?

ज्यादातर मामलों में, आई फ्लोटर्स हानिकारक नहीं होते और समय के साथ हमारा मस्तिष्क इन्हें अनदेखा करना सीख जाता है। लेकिन, कुछ स्थितियों में यह एक इमरजेंसी हो सकती है:

  • रेटिना डिटैचमेंट (Retinal Detachment): अगर अचानक फ्लोटर्स की संख्या बहुत बढ़ जाए, तो यह संकेत हो सकता है कि आपकी आंख का पर्दा (रेटिना) अपनी जगह से हट रहा है।
  • प्रकाश की चमक (Flashes): अगर फ्लोटर्स के साथ आपको बिजली की चमक जैसी रोशनी दिखाई दे, तो तुरंत डॉक्टर से मिलें।
  • दृष्टि का कम होना: अगर आपको अपनी नजर के किनारों पर अंधेरा महसूस हो (Curtain Effect), तो यह गंभीर स्थिति है।
Eye Floaters
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जांच और उपचार

अगर आपको पहली बार फ्लोटर्स महसूस हुए हैं, तो एक नेत्र रोग विशेषज्ञ (Ophthalmologist) से संपर्क करें। डॉक्टर आपकी पुतली फैलाकर रेटिना की जांच करेंगे।

  • सामान्य उपचार: अधिकांश समय डॉक्टर किसी भी उपचार की सलाह नहीं देते क्योंकि यह उम्र से जुड़ा बदलाव है।
  • विट्रेक्टोमी (Vitrectomy): बहुत ही गंभीर मामलों में, जहां फ्लोटर्स दृष्टि को बुरी तरह प्रभावित कर रहे हों, सर्जरी के जरिए जेली को बदला जा सकता है।
  • लेजर थेरेपी: कुछ मामलों में लेजर के जरिए इन गुच्छों को तोड़ा जाता है।

बचाव के उपाय

  • नियमित चेकअप: साल में एक बार आंखों की जांच जरूर करवाएं।
  • स्वस्थ आहार: हरी पत्तेदार सब्जियां, ओमेगा-3 फैटी एसिड और विटामिन-ए युक्त भोजन लें।
  • आराम: कंप्यूटर या मोबाइल के ज्यादा इस्तेमाल के बीच आंखों को आराम दें (20-20-20 नियम अपनाएं)।
  • धूप का चश्मा: बाहर जाते समय UV प्रोटेक्शन वाले चश्मे पहनें।


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