Wednesday, March 4, 2026
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Chandra Grahan 2026: कल लगेगा साल का पहला चंद्र ग्रहण, गर्भवती महिलाएं भूलकर भी न करें ये गलतियां


Chandra Grahan 2026: साल 2026 का पहला चंद्र ग्रहण कल लगेगा। जानें गर्भवती महिलाओं को ग्रहण के दौरान किन सावधानियों का पालन करना चाहिए और क्या कहता है ज्योतिष शास्त्र।

कल साल का पहला चंद्र ग्रहण है! गर्भावस्था के दौरान ग्रहण को लेकर मन में कई सवाल होते हैं। क्या करें और क्या न करें? शास्त्रों के अनुसार किन बातों का ध्यान रखना जरूरी है? अपनी और अपने आने वाले नन्हे मेहमान की सुरक्षा के लिए ये गाइड जरूर पढ़ें। पूरी जानकारी नीचे दी गई है!

Chandra Grahan 2026: चंद्र ग्रहण और गर्भावस्था—सावधानियां, नियम और धार्मिक मान्यताएं

साल 2026 का आगाज खगोलीय घटनाओं के साथ हो रहा है। 3 मार्च 2026 को लगने वाला यह चंद्र ग्रहण न केवल खगोलीय दृष्टि से महत्वपूर्ण है, बल्कि ज्योतिषीय नजरिए से भी इसके कई मायने हैं। विशेष रूप से गर्भवती महिलाओं के लिए हमारे शास्त्रों में ग्रहण के समय कुछ कड़े नियमों और सावधानियों का उल्लेख मिलता है।

माना जाता है कि ग्रहण के दौरान निकलने वाली नकारात्मक ऊर्जा का प्रभाव गर्भ में पल रहे शिशु पर पड़ सकता है। आइए जानते हैं कि इस दौरान गर्भवती महिलाओं को किन बातों का खास ख्याल रखना चाहिए।

Chandra Grahan 2026
Chandra Grahan 2026

चंद्र ग्रहण 2026 का समय और सूतक काल Chandra Grahan 2026

कल लगने वाला चंद्र ग्रहण पूर्ण चंद्र ग्रहण होगा। शास्त्रों के अनुसार, चंद्र ग्रहण का सूतक काल ग्रहण शुरू होने से 9 घंटे पहले ही लग जाता है। सूतक काल के दौरान मंदिरों के कपाट बंद कर दिए जाते हैं और शुभ कार्य वर्जित होते हैं। गर्भवती महिलाओं को सूतक काल से ही नियमों का पालन शुरू कर देना चाहिए।

Chandra Grahan 2026
Chandra Grahan 2026

गर्भवती महिलाओं के लिए विशेष सावधानियां (Do’s and Don’ts)

1. नुकीली और धारधार चीजों से दूरी

शास्त्रों में स्पष्ट कहा गया है कि ग्रहण के दौरान गर्भवती महिला को कैंची, सुई, चाकू या किसी भी धारधार चीज का इस्तेमाल नहीं करना चाहिए। मान्यता है कि ऐसा करने से शिशु के अंगों पर बुरा प्रभाव पड़ सकता है।

2. ग्रहण की छाया से बचें

ग्रहण के दौरान चंद्रमा की सीधी रोशनी या परछाई गर्भवती महिला पर नहीं पड़नी चाहिए। इसलिए सलाह दी जाती है कि ग्रहण काल के दौरान महिलाएं घर के भीतर ही रहें और खिड़कियों को भारी पर्दों से ढंक दें।

3. खान-पान के नियम

सूतक काल और ग्रहण के दौरान भोजन बनाना और खाना वर्जित माना जाता है। हालांकि, गर्भवती महिलाओं और बीमारों के लिए इसमें छूट दी गई है।

  • उपाय: ग्रहण शुरू होने से पहले ही पीने के पानी और खाने की चीजों में कुशा या तुलसी के पत्ते डाल दें। इससे भोजन दूषित नहीं होता।

4. सोने की मनाही

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, ग्रहण के समय सोना नहीं चाहिए। इस समय को मंत्रों के जाप और ईश-आराधना के लिए सबसे उत्तम माना गया है। गर्भवती महिलाएं बैठकर या आराम की मुद्रा में ‘ॐ नमः शिवाय’ या ‘संतान गोपाल मंत्र’ का जाप कर सकती हैं।

5. सिलाई-कढ़ाई और ताला खोलना

पुराने समय से चली आ रही मान्यताओं के अनुसार, ग्रहण के दौरान कपड़े सिलना या किसी भी प्रकार की गांठ बांधना अशुभ माना जाता है। यहाँ तक कि ताला लगाने या खोलने से भी बचने की सलाह दी जाती है।

ग्रहण समाप्त होने के बाद क्या करें?

ग्रहण खत्म होते ही नकारात्मक ऊर्जा का प्रभाव खत्म करने के लिए कुछ कार्य अनिवार्य हैं:

  • स्नान: ग्रहण समाप्ति के तुरंत बाद गर्भवती महिला को शुद्ध जल से स्नान करना चाहिए। पानी में थोड़ा गंगाजल मिलाना अत्यंत शुभ होता है।
  • दान-पुण्य: स्नान के बाद सामर्थ्य अनुसार सफेद वस्तुओं (जैसे चावल, चीनी, दूध या सफेद कपड़े) का दान करें। इससे ग्रहण के दोष दूर होते हैं।
  • शुद्धिकरण: पूरे घर में गंगाजल का छिड़काव करें और घर के मंदिर की सफाई करें।

क्या कहता है विज्ञान?

जहाँ ज्योतिष शास्त्र इन सावधानियों पर जोर देता है, वहीं आधुनिक विज्ञान इसे केवल एक खगोलीय घटना मानता है। वैज्ञानिकों के अनुसार, चंद्र ग्रहण के दौरान चंद्रमा से ऐसी कोई हानिकारक किरणें नहीं निकलतीं जो त्वचा या शरीर को नुकसान पहुँचाएं। हालांकि, मन की शांति और परंपराओं के सम्मान के लिए इन नियमों का पालन करना एक व्यक्तिगत चुनाव है।

3 मार्च 2026 का चंद्र ग्रहण सावधानी और आस्था का संगम है। गर्भवती महिलाओं को घबराने की जरूरत नहीं है, बल्कि सकारात्मक सोच के साथ भगवान का ध्यान करना चाहिए। बड़ों की सलाह और शास्त्रों के नियमों का पालन करने से मन में सुरक्षा का भाव बना रहता है।

Chandra Grahan 2026 आम आदमी को क्या करें चन्द्र ग्रहण के दौरान?

सामान्य जनमानस के लिए चंद्र ग्रहण के दौरान संयम और आध्यात्मिकता का पालन करना श्रेष्ठ माना जाता है। शास्त्रों के अनुसार, ग्रहण काल में भोजन करने, सोने या नए शुभ कार्यों की शुरुआत करने से बचना चाहिए, क्योंकि इस समय प्राकृतिक ऊर्जा का स्तर असंतुलित रहता है। आम आदमी को इस दौरान मानसिक जाप, ध्यान और अपने ईष्ट देव की आराधना करनी चाहिए ताकि नकारात्मकता का प्रभाव कम हो सके। ग्रहण समाप्त होने के बाद पूरे घर में गंगाजल का छिड़काव करना, स्नान करना और सामर्थ्य अनुसार अनाज या सफेद वस्तुओं का दान करना अत्यंत कल्याणकारी माना जाता है।



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