Jyeshtha Adhik Maas 2026: 17 मई से शुरू हो रहा है भगवान विष्णु का प्रिय ‘पुरुषोत्तम मास’, जानें महत्व और शुभ फल के उपाय
साल 2026 में ज्येष्ठ मास में अधिक मास लग रहा है। 17 मई से 15 जून तक चलने वाले इस ‘पुरुषोत्तम मास’ में भगवान विष्णु की पूजा का विशेष महत्व है। जानें दान, पुण्य और व्रत की पूरी जानकारी। ज्येष्ठ माह में अधिक मास का दुर्लभ संयोग; जानें क्यों कहते हैं इसे पुरुषोत्तम मास और इस दौरान क्या करें और क्या न करें।
ज्येष्ठ अधिक मास 2026 एक अत्यंत दुर्लभ और पवित्र अवसर है। ज्योतिषीय गणना के अनुसार, जब एक ही महीना दो बार आता है, तो उसे अधिक मास कहा जाता है। इस बार यह संयोग ‘ज्येष्ठ’ के महीने में बन रहा है।
17 मई से शुरू हो रहा है पुण्य का सागर ‘अधिक मास’। इसे साक्षात् भगवान विष्णु का आशीर्वाद प्राप्त है। इस महीने की गई भक्ति का फल अनंत होता है।
ज्येष्ठ अधिक मास 2026: अध्यात्म, विज्ञान और भगवान विष्णु की कृपा का पावन संगम

Jyeshtha Adhik Maas 2026
हिंदू पंचांग के अनुसार, साल 2026 एक विशेष आध्यात्मिक महत्व लेकर आ रहा है। इस वर्ष 17 मई से 15 जून 2026 तक ‘अधिक मास’ रहेगा। विशेष बात यह है कि यह ‘ज्येष्ठ’ के महीने में पड़ रहा है, जिसे शास्त्रों में बहुत ही पवित्र माना गया है। अधिक मास को ‘पुरुषोत्तम मास’ या ‘मलमास’ के नाम से भी जाना जाता है।
Jyeshtha Adhik Maas 2026 आइए विस्तार से समझते हैं कि यह मास क्यों आता है और इस दौरान किन नियमों का पालन करना चाहिए।
अधिक मास क्यों आता है? (वैज्ञानिक और ज्योतिषीय कारण)
हिंदू कैलेंडर सूर्य और चंद्रमा दोनों की चाल पर आधारित होता है।
- सौर वर्ष (Solar Year): पृथ्वी सूर्य के चारों ओर 365 दिन और लगभग 6 घंटे में एक चक्कर पूरा करती है।
- चंद्र वर्ष (Lunar Year): चंद्रमा के आधार पर एक वर्ष 354 दिनों का होता है।

इन दोनों के बीच हर साल लगभग 11 दिनों का अंतर आ जाता है। तीन साल में यह अंतर बढ़कर लगभग 33 दिन (एक महीने के बराबर) हो जाता है। इसी अंतर को पाटने और चंद्र मास को सौर मास के साथ तालमेल बिठाने के लिए हर तीसरे साल पंचांग में एक अतिरिक्त महीना जोड़ दिया जाता है, जिसे ‘अधिक मास’ कहते हैं।

इसे ‘पुरुषोत्तम मास’ क्यों कहा जाता है? (पौराणिक कथा)
पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, जब इस अतिरिक्त महीने की उत्पत्ति हुई, तो इसे ‘मलमास’ कहा गया और इसे अपवित्र मानकर कोई भी देवता इसका स्वामी बनने को तैयार नहीं था। हर शुभ कार्य में वर्जित होने के कारण यह महीना दुखी होकर भगवान विष्णु के पास गया।
भगवान विष्णु ने इसकी व्यथा सुनी और इसे अपना नाम ‘पुरुषोत्तम’ प्रदान किया। उन्होंने वरदान दिया कि जो भी इस मास में मेरी भक्ति, जप, तप और दान करेगा, उसे पूरे साल की पूजा से भी अधिक फल प्राप्त होगा। तब से यह मास भगवान विष्णु का सबसे प्रिय मास बन गया।

ज्येष्ठ अधिक मास 2026 का महत्व
ज्येष्ठ का महीना वैसे ही तप और दान का महीना होता है। इस महीने में सूर्य देव अपनी प्रचंड अवस्था में होते हैं। ऐसे में अधिक मास का ज्येष्ठ में आना पुण्य के फल को कई गुना बढ़ा देता है। यह समय आत्म-शुद्धि, मानसिक शांति और प्रभु की निकटता पाने का सबसे उत्तम काल है।
Jyeshtha Adhik Maas 2026 क्या करें और क्या न करें?
क्या करें (करणीय कार्य):
- मंत्र जाप: ‘ॐ नमो भगवते वासुदेवाय’ या ‘श्री कृष्ण शरणम मम’ का जाप अत्यंत फलदायी है।
- श्रीमद्भागवत कथा: इस मास में भागवत पुराण या विष्णु सहस्रनाम का पाठ सुनना या पढ़ना मोक्ष प्रदायक माना जाता है।
- दीप दान: संध्या के समय तुलसी के पौधे के पास और पास के मंदिर में दीप दान करना चाहिए।
- ब्रह्मचर्य और सात्विकता: इस महीने में सात्विक भोजन ग्रहण करना चाहिए और विचारों में शुद्धता रखनी चाहिए।
क्या न करें (वर्जित कार्य):
- अधिक मास में काम्य कर्म (जैसे विवाह, मुंडन, गृह प्रवेश, या नया व्यवसाय शुरू करना) वर्जित माने जाते हैं।
- नशीले पदार्थों और तामसिक भोजन (मांस, मदिरा, लहसुन, प्याज) से परहेज करना चाहिए।
- विवाद और क्रोध से बचना चाहिए क्योंकि यह मास मानसिक शांति का है।

विशेष दान और पुण्य फल Jyeshtha Adhik Maas 2026
पुरुषोत्तम मास में ’33’ की संख्या का बड़ा महत्व है। शास्त्रों के अनुसार, इस मास में 33 मालपुआ, 33 फल या 33 दीपकों का दान करना बहुत शुभ माना जाता है।
- जल दान: ज्येष्ठ मास की गर्मी को देखते हुए राहगीरों को जल पिलाना या प्याऊ लगवाना महादान माना गया है।
- अन्न दान: गरीबों और ब्राह्मणों को अनाज और मौसमी फलों का दान करें।
- वस्त्र दान: पीले रंग के वस्त्रों का दान भगवान विष्णु को प्रसन्न करता है।
ज्येष्ठ अधिक मास 2026 हम सभी के लिए एक अवसर है कि हम अपनी भागदौड़ भरी जिंदगी से थोड़ा समय निकालकर अध्यात्म से जुड़ें। यह मास केवल पूजा-पाठ का ही नहीं, बल्कि दान के माध्यम से समाज की सेवा करने का भी संदेश देता है। भगवान पुरुषोत्तम की कृपा पाने के लिए श्रद्धा और विश्वास के साथ इन 30 दिनों का सदुपयोग करें।
⚠️ जरूरी सूचना (Disclaimer)
VR लाइव इस पोस्ट में दी गई ज्योतिषीय और पौराणिक जानकारी की पूर्ण सत्यता की पुष्टि नहीं करता है। यह लेख केवल आपकी जागरूकता और जानकारी (Information) के लिए साझा किया गया है। किसी भी विशेष पूजा, अनुष्ठान या व्रत के सही मुहूर्त और विधि के लिए अपने पारिवारिक पुरोहित या योग्य ज्योतिषाचार्य से परामर्श अवश्य लें।
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