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Iran Israel War जंग के 35 दिन: ईरान, इजराइल और अमेरिका के हथियारों का लेखा-जोखा; कितनी तबाही और कितना नुकसान?

Iran Israel War जंग के 35 दिन: ईरान, इजराइल और अमेरिका के हथियारों का लेखा-जोखा; कितनी तबाही और कितना नुकसान?

Iran Israel War ईरान-इजराइल युद्ध के 35 दिन पूरे। जानें दोनों पक्षों ने कितनी मिसाइलें दागीं, कितने सैनिक और नागरिक मारे गए, और क्या अमेरिका के घातक हथियारों का जखीरा खत्म हो रहा है?

युद्ध के गणित ने सबको चौंकाया

Iran Israel War जंग के 35 दिन: तबाही का मंजर और हथियारों का हिसाब-किताब

मध्य पूर्व (Middle East) में जारी जंग को 35 दिन बीत चुके हैं। इन पांच हफ्तों में दुनिया ने आधुनिक युद्ध का सबसे भीषण रूप देखा है। एक तरफ इजराइल और अमेरिका की अत्याधुनिक तकनीक है, तो दूसरी तरफ ईरान का विशाल मिसाइल नेटवर्क और ‘प्रॉक्सि’ वॉरफेयर। इस जंग ने न केवल हजारों जानें ली हैं, बल्कि तीनों देशों के सैन्य संसाधनों पर भारी दबाव डाल दिया है।

Iran Israel War हथियारों का इस्तेमाल: कौन किस पर भारी?

इजराइल और अमेरिका: इजराइल ने मुख्य रूप से अपने Iron Dome, David’s Sling और Arrow डिफेंस सिस्टम का इस्तेमाल किया है। रिपोर्टों के अनुसार, इजराइल ने अब तक 5,000 से अधिक इंटरसेप्टर मिसाइलें दागी हैं। अमेरिका ने इजराइल की मदद के लिए अपने THAAD (Terminal High Altitude Area Defense) सिस्टम और विमानवाहक पोतों से गाइडेड मिसाइलें तैनात की हैं। इजराइल के F-35 लड़ाकू विमानों ने ईरान के संदिग्ध ठिकानों पर सैकड़ों टन गोला-बारूद गिराया है।

ईरान: ईरान की रणनीति ‘सस्ते और प्रभावी’ हथियारों की रही है। पिछले 35 दिनों में ईरान और उसके सहयोगियों (हिजबुल्लाह, हूती) ने 3,000 से अधिक Shahed-136 ड्रोन और सैकड़ों बैलिस्टिक मिसाइलें (जैसे Fattah और Kheibar Shekan) दागी हैं। ईरान का दावा है कि उसने अपने भंडार का केवल 10% ही इस्तेमाल किया है।

Iran Israel War
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हथियारों की कमी: क्या अमेरिका का जखीरा खाली हो रहा है?

सैन्य विशेषज्ञों के लिए सबसे बड़ी चिंता इजराइल के डिफेंस सिस्टम की लागत है। ईरान का एक ड्रोन महज $20,000 में बनता है, जबकि उसे हवा में मार गिराने वाली इजराइल की एक Tamir मिसाइल की कीमत $50,000 से $1,00,000 तक होती है।

  • इंटरसेप्टर की कमी: अमेरिका के रक्षा विभाग (Pentagon) के भीतर यह चर्चा तेज है कि यदि जंग लंबी खिंची, तो अमेरिका के पास खुद के बचाव के लिए मिसाइलों की कमी हो सकती है क्योंकि उत्पादन की गति खपत से कम है।

जान-माल का नुकसान (हताहतों की संख्या)

इन 35 दिनों में मानवीय क्षति का आंकड़ा डराने वाला है:

  • मौतें: विभिन्न अंतरराष्ट्रीय मीडिया रिपोर्ट्स और स्वास्थ्य मंत्रालयों के अनुसार, इस संघर्ष में अब तक 12,000 से अधिक लोग अपनी जान गंवा चुके हैं। इसमें लड़ाकों के साथ-साथ बड़ी संख्या में नागरिक भी शामिल हैं।
  • विस्थापन: लेबनान, उत्तरी इजराइल और ईरान के सीमावर्ती इलाकों से करीब 20 लाख लोग विस्थापित हुए हैं।
  • आर्थिक नुकसान: केवल इजराइल को इस युद्ध में प्रतिदिन $250 मिलियन का खर्च उठाना पड़ रहा है। वहीं, ईरान के तेल ढांचों पर हमलों के खतरे ने उसकी अर्थव्यवस्था को अस्थिर कर दिया है।

किसके पास क्या बचा है?

  • इजराइल: इजराइल के पास अभी भी दुनिया का सबसे बेहतरीन वायुसेना बेड़ा है, लेकिन वे पूरी तरह से अमेरिकी सप्लाई लाइन पर निर्भर हैं।
  • ईरान: ईरान के पास जमीन के नीचे छिपी ‘मिसाइल सिटीज’ हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि ईरान के पास अभी भी 20,000 से अधिक लंबी दूरी की मिसाइलें बची हैं।
  • अमेरिका: अमेरिका ने भूमध्य सागर में दो एयरक्राफ्ट कैरियर तैनात किए हैं, लेकिन वह सीधे युद्ध में कूदने के बजाय ‘सुरक्षा कवच’ की भूमिका निभा रहा है।

35 दिनों की इस जंग ने यह साबित कर दिया है कि आधुनिक युद्ध केवल ताकत से नहीं, बल्कि ‘सहनशक्ति’ (Endurance) से जीता जाता है। जहाँ इजराइल और अमेरिका के पास महंगे और सटीक हथियार हैं, वहीं ईरान के पास संख्या बल और सस्ते हथियारों का भंडार है। यदि कूटनीतिक समाधान नहीं निकला, तो यह हथियारों की होड़ पूरे क्षेत्र को दशकों पीछे धकेल देगी।

Iran Israel War
Iran Israel War

इस युद्ध में मौतों का सटीक आंकड़ा देना मुश्किल है क्योंकि अलग-अलग मोर्चों (इजराइल, लेबनान, गाजा और ईरान) से खबरें लगातार बदल रही हैं, लेकिन अंतरराष्ट्रीय मीडिया रिपोर्ट्स और सैन्य विश्लेषकों के अनुसार, पिछले 35 दिनों के भीषण संघर्ष में अंदाजित 12,000 से 15,000 लोगों की जान जाने की आशंका जताई जा रही है।

इस संख्या को हम तीन मुख्य हिस्सों में देख सकते हैं: Iran Israel War

1. लेबनान और हिजबुल्लाह का मोर्चा

सबसे ज्यादा हताहत लेबनान के इलाकों में हुए हैं। इजराइली हवाई हमलों और जमीनी कार्रवाई में अब तक 3,000 से अधिक लोगों की मौत की पुष्टि हो चुकी है, जिनमें हिजबुल्लाह के लड़ाके और आम नागरिक दोनों शामिल हैं।

2. इजराइल और उत्तरी क्षेत्र

ईरान और उसके सहयोगियों (हिजबुल्लाह और हूती) द्वारा दागी गई मिसाइलों और ड्रोन्स के कारण इजराइल में भी नुकसान हुआ है। सैन्य ठिकानों और सीमावर्ती इलाकों में अब तक अंदाजित 100 से 150 सैनिकों और नागरिकों की मौत दर्ज की गई है। हालांकि, इजराइल का ‘आयरन डोम’ सिस्टम कई मौतों को रोकने में सफल रहा है।

3. ईरान और अन्य सहयोगी

ईरान के भीतर हुए इजराइली हमलों (जैसे मिसाइल यूनिट्स और एयर डिफेंस सिस्टम पर हमले) में ईरान ने अपने 5 से 10 प्रमुख सैन्य अधिकारियों और सैनिकों की मौत स्वीकार की है। हालांकि, जमीनी हकीकत में यह संख्या और अधिक हो सकती है क्योंकि कई सैन्य ठिकानों पर भारी बमबारी हुई है।

मौतों का मुख्य कारण: Iran Israel War

  • हवाई हमले: 70% मौतें मिसाइल और फाइटर जेट्स की बमबारी के कारण हुई हैं।
  • जमीनी मुठभेड़: लेबनान की सीमा पर आमने-सामने की जंग में सैनिकों की जान जा रही है।
  • मलबे में दबे लोग: कई इलाकों में बचाव कार्य जारी है, जिससे मरने वालों की संख्या आने वाले दिनों में बढ़ सकती है।

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