Tvisha Sharma Death Case: ट्विशा शर्मा केस में नया मोड़ हाई कोर्ट ने दी दोबारा पोस्टमार्टम की इजाजत, दिल्ली से बुलाई गई एम्स की टीम
Tvisha Sharma Death Case: ट्विशा शर्मा मौत मामले में मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने दोबारा पोस्टमार्टम (Re-Postmortem) की इजाजत दे दी है। जांच के लिए दिल्ली AIIMS की विशेष डॉक्टरों की टीम भोपाल जाएगी। जानिए क्या है पूरा मामला और क्यों कोर्ट को लेना पड़ा यह बड़ा फैसला।
Tvisha Sharma Death Case: ट्विशा शर्मा मौत मामले में एक बड़ा मोड़ सामने आया है! मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने शव का दोबारा पोस्टमार्टम (Re-Postmortem) कराने की मंजूरी दे दी है। इस हाई-प्रोफाइल मामले की गुत्थी सुलझाने के लिए अब दिल्ली AIIMS की एक विशेष मेडिकल टीम भोपाल रवाना होगी। मृतका के परिवार ने पहले हुए पोस्टमार्टम पर गंभीर सवाल उठाए थे। क्या इस नए फैसले से सच सामने आ पाएगा?
ट्विशा शर्मा मौत मामला: MP हाई कोर्ट का बड़ा फैसला, दिल्ली AIIMS की टीम भोपाल में दोबारा करेगी पोस्टमार्टम Tvisha Sharma Death Case


भोपाल/जबलपुर: मध्य प्रदेश के बहुचर्चित ट्विशा शर्मा मौत मामले में एक नया और बेहद महत्वपूर्ण मोड़ आ गया है। मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने मामले की गंभीरता और फॉरेंसिक जांच पर उठे सवालों को देखते हुए मृतका के शव का दोबारा पोस्टमार्टम (Re-Postmortem) कराने की अनुमति दे दी है। कोर्ट के इस आदेश के बाद अब देश के सबसे प्रतिष्ठित चिकित्सा संस्थान, दिल्ली एम्स (AIIMS) के फॉरेंसिक विशेषज्ञों की एक विशेष टीम भोपाल जाएगी, जहाँ उनकी देखरेख में यह पूरी प्रक्रिया दोबारा संपन्न की जाएगी।
इस फैसले ने एक बार फिर इस संवेदनशील मामले को सुर्खियों में ला दिया है और पीड़ित परिवार के लिए न्याय की एक नई उम्मीद जगाई है।

Tvisha Sharma Death Case: क्या है पूरा मामला?
ट्विशा शर्मा की संदिग्ध परिस्थितियों में हुई मौत ने शुरुआत से ही कई सवाल खड़े कर दिए थे। स्थानीय पुलिस ने शुरुआती जांच के बाद इसे आत्महत्या का मामला बताया था, लेकिन ट्विशा के माता-पिता और परिजनों ने इस थ्योरी को सिरे से खारिज कर दिया था। परिवार का आरोप है कि ट्विशा ने आत्महत्या नहीं की, बल्कि उसकी हत्या की गई है या फिर उसे ऐसा कदम उठाने के लिए मजबूर किया गया है।
स्थानीय स्तर पर जब ट्विशा का पहला पोस्टमार्टम किया गया, तो उसकी रिपोर्ट आने के बाद परिवार की शंकाएं और बढ़ गईं। परिजनों का दावा था कि पहली पोस्टमार्टम रिपोर्ट में कई अहम पहलुओं को नजरअंदाज किया गया है और चोट के कुछ निशानों की सही व्याख्या नहीं की गई है। स्थानीय पुलिस की जांच और मेडिकल रिपोर्ट से असंतुष्ट होकर परिवार ने आखिरकार न्याय के लिए मध्य प्रदेश हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया।

हाई कोर्ट में हुई तीखी बहस
ट्विशा के परिवार की ओर से कोर्ट में याचिका दायर कर स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच की मांग की गई थी। याचिका में विशेष रूप से यह मांग शामिल थी कि किसी निष्पक्ष और केंद्रीय स्तर की मेडिकल संस्था से दोबारा पोस्टमार्टम कराया जाए ताकि मौत के सही कारणों (Cause of Death) का पता लगाया जा सके।
हाई कोर्ट में मामले की सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता के वकीलों ने दलील दी कि पहली फॉरेंसिक जांच में कई खामियां थीं, जो किसी बड़े दबाव या लापरवाही की ओर इशारा करती हैं। वहीं, सरकारी पक्ष ने शुरुआत में इस मांग का विरोध करते हुए कहा कि स्थानीय डॉक्टरों की टीम ने नियमों के तहत ही पीएम किया था। हालांकि, कोर्ट ने मामले की संवेदनशीलता, चोटों की प्रकृति और न्याय के सिद्धांतों को सर्वोपरि रखते हुए याचिकाकर्ता के पक्ष में फैसला सुनाया।
दिल्ली AIIMS की टीम करेगी जांच
मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने अपने आदेश में स्पष्ट किया है कि जांच की निष्पक्षता और विश्वसनीयता बनाए रखने के लिए देश की सर्वोच्च मेडिकल संस्था का शामिल होना जरूरी है। कोर्ट ने दिल्ली एम्स (AIIMS) के फॉरेंसिक मेडिसिन विभाग को एक विशेष टीम गठित करने का निर्देश दिया है।
यह टीम जल्द ही दिल्ली से भोपाल के लिए रवाना होगी। भोपाल में सुरक्षित रखे गए ट्विशा के शव या उससे जुड़े फॉरेंसिक साक्ष्यों की दोबारा कड़ाई से जांच की जाएगी। इस पूरी प्रक्रिया की वीडियोग्राफी भी कराई जा सकती है ताकि भविष्य में किसी भी प्रकार की तकनीकी खामी या छेड़छाड़ की गुंजाइश न रहे।

दोबारा पोस्टमार्टम क्यों बन गया था जरूरी?
फॉरेंसिक विशेषज्ञों के अनुसार, जब किसी मामले में हत्या और आत्महत्या के बीच का अंतर धुंधला होने लगता है, तो पोस्टमार्टम रिपोर्ट ही सबसे बड़ा कानूनी दस्तावेज बनती है। ट्विशा शर्मा के मामले में निम्नलिखित कारणों से री-पोस्टमार्टम की मांग पर जोर दिया गया: Tvisha Sharma Death Case
- चोट के निशानों में विरोधाभास: परिवार का दावा है कि ट्विशा के शरीर पर कुछ ऐसे निशान थे जो केवल फांसी लगाने (Hanging) से नहीं आ सकते, बल्कि वे संघर्ष (Scuffle) के भी हो सकते हैं।
- समय का निर्धारण: मौत के सटीक समय (Time since death) को लेकर भी पहली रिपोर्ट में कुछ अस्पष्टताएं थीं।
- स्थानीय प्रभाव की आशंका: हाई-प्रोफाइल मामलों में अक्सर स्थानीय पुलिस या डॉक्टरों पर प्रभाव डालने की कोशिशों के आरोप लगते हैं। एम्स की टीम के आने से यह आशंका पूरी तरह खत्म हो जाती है।
परिवार को न्याय की उम्मीद
हाई कोर्ट के इस ऐतिहासिक आदेश के बाद ट्विशा के माता-पिता ने कोर्ट का आभार व्यक्त किया है। उन्होंने मीडिया से बात करते हुए कहा, “हम शुरू से कह रहे हैं कि सच को छुपाने की कोशिश की जा रही है। हमें मध्य प्रदेश की न्यायपालिका पर पूरा भरोसा था। अब जब दिल्ली एम्स के डॉक्टर इस मामले को देखेंगे, तो हमें विश्वास है कि हमारी बेटी की मौत का असली सच दुनिया के सामने आ जाएगा।”
आगे क्या होगा?
हाई कोर्ट के आदेश की कॉपी मिलते ही दिल्ली एम्स प्रशासन ने टीम का गठन शुरू कर दिया है। भोपाल के स्थानीय प्रशासन और मेडिकल कॉलेज को भी अलर्ट पर रखा गया है ताकि एम्स की टीम को सभी आवश्यक संसाधन और सुरक्षा उपलब्ध कराई जा सके। इस री-पोस्टमार्टम की रिपोर्ट सीधे कोर्ट के समक्ष पेश की जा सकती है, जिसके बाद इस मामले की दिशा तय होगी। यदि एम्स की रिपोर्ट में हत्या या किसी अन्य साजिश के संकेत मिलते हैं, तो पुलिस को नए सिरे से हत्या की धाराओं में मामला दर्ज कर जांच करनी होगी।
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