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Paneer 65 के नाम के पीछे छिपा है ये खास राज, जानिए इसे “65” ही क्यों कहा जाता है?

Paneer 65 के नाम के पीछे छिपा है ये खास राज, जानिए इसे “65” ही क्यों कहा जाता है?

क्या आप जानते हैं कि पनीर 65 को “65” क्यों कहा जाता है? कहाँ से आया यह अनोखा नाम और किसने बनाई थी यह मशहूर डिश? जानिए इस मशहूर डिश के जन्म की असली कहानी, इसके आविष्कारक का नाम और इसके नाम से जुड़े कुछ ऐसे मजेदार मिथक जो आपको हैरान कर देंगे।

Paneer 65… रेस्टोरेंट में कदम रखते ही स्टार्टर्स में सबसे पहला नाम इसी का याद आता है। चटपटा, क्रिस्पी और स्वाद से भरपूर! 🤤 लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि इसके नाम के आगे यह '65' अंक क्यों लगा है? क्या इसमें 65 मसाले डलते हैं या इसे बनाने में 65 मिनट लगते हैं? इसके पीछे की असली कहानी और चेन्नई के एक मशहूर होटल का वो राज़ जानने के लिए पूरी पोस्ट पढ़ें जो बेहद दिलचस्प है!

Paneer 65 को “65” क्यों कहते हैं? 65 मसाले? 65 दिन का पुराना नुस्खा? या कुछ और?

Paneer 65
Paneer 65

Paneer 65 के नाम के पीछे छिपा है ये खास राज: जानिए क्यों कहा जाता है इसे “65” और कहाँ से शुरू हुआ इसका सफर?

भारतीय खान-पान में स्टार्टर्स (Starters) की बात हो और ’65’ सीरीज का नाम न आए, ऐसा हो ही नहीं सकता। चाहे शाकाहारी लोगों की पहली पसंद पनीर 65 (Paneer 65) या गोभी 65 हो, या फिर मांसाहारी शौकीनों का पसंदीदा चिकन 65—यह डिश हर पार्टी और रेस्टोरेंट के मेन्यू की जान होती है। लाल चटक रंग, कढ़ी पत्ते और हरी मिर्च का तड़का, और ऊपर से क्रिस्पी और अंदर से एकदम सॉफ्ट पनीर का टुकड़ा मुंह में जाते ही स्वाद का धमाका कर देता है।

स्वाद तो हम सब बड़े चाव से लेते हैं, लेकिन इसके नाम को देखकर हर किसी के दिमाग में एक बार यह सवाल ज़रूर कौंधता है कि आखिर इस डिश का नाम ‘पनीर 65’ क्यों है? क्या इसे बनाने में 65 मसाले लगते हैं? क्या यह 65 फीट ऊंचे पेड़ पर उगता है (बिल्कुल नहीं!)? या फिर इसके पीछे कोई और ही गणित है? आइए जानते हैं इस अनोखे नाम की असली कहानी, इसके आविष्कारक का नाम और इससे जुड़ी कुछ बेहद मजेदार अफवाहें।

Paneer 65 कहाँ की डिश है ये और किसने बनाया था सबसे पहले? (The Origin)

पनीर 65 के इतिहास को समझने के लिए हमें इसके मूल रूप यानी ‘चिकन 65’ के इतिहास को जानना होगा, क्योंकि पनीर 65 इसी का शाकाहारी रूप है।

यह डिश मूल रूप से दक्षिण भारत के चेन्नई (तमिलनाडु) की है। इसका आविष्कार चेन्नई के एक बेहद मशहूर और ऐतिहासिक रेस्टोरेंट ‘होटल बुहारी’ (Buhari Hotel) में हुआ था। इस मशहूर डिश को सबसे पहले साल 1965 में होटल बुहारी के मालिक ए. एम. बुहारी (A.M. Buhari) ने बनाया था।

Paneer 65

ए. एम. बुहारी को नए-नए फूड एक्सपेरिमेंट करने के लिए जाना जाता था। उन्होंने साल 1965 में चिकन के साथ एक तीखा और चटपटा स्टार्टर तैयार किया, जो ग्राहकों को इतना पसंद आया कि वह देखते ही देखते पूरे देश में मशहूर हो गया। चूंकि यह डिश पहली बार 1965 में बनाई गई थी, इसलिए इसका नाम ‘चिकन 65’ रख दिया गया। बाद में, जब यह स्वाद शाकाहारी लोगों तक पहुँचाना था, तो चिकन की जगह पनीर का इस्तेमाल शुरू हुआ और इस तरह जन्म हुआ ‘पनीर 65’ का।

पनीर 65 के नाम से जुड़ी अन्य कहानियाँ और मिथक

होटल बुहारी का ‘साल 1965’ वाला दावा सबसे सटीक और प्रामाणिक माना जाता है, लेकिन इंटरनेट और खाने के शौकीनों के बीच इसके नाम को लेकर कई अन्य मजेदार कहानियाँ और अफवाहें भी खूब प्रचलित हैं। आइए उन पर भी एक नज़र डालते हैं:

Paneer 65
Paneer 65

1. 65 मसालों का जादू

एक लोकप्रिय कहानी यह है कि जब इस डिश को पहली बार तैयार किया गया था, तो इसमें पूरे 65 तरह के अलग-अलग मसालों और जड़ी-बूटियों का इस्तेमाल किया गया था। हालांकि, यह कहानी पूरी तरह से काल्पनिक लगती है क्योंकि इतने सारे मसालों को एक साथ मिलाने पर स्वाद बेहतर होने के बजाय कड़वा या अजीब हो सकता है।

2. 65 दिनों का पुराना चिकन या पनीर

कुछ अजीबोगरीब कहानियों में यह भी दावा किया जाता है कि इस डिश को बनाने के लिए मीट को 65 दिनों तक मैरिनेट (मसाले लगाकर रखना) किया जाता था, या फिर इसे बनाने के लिए जो चूजा (Chicken) इस्तेमाल होता था उसकी उम्र ठीक 65 दिन होती थी। शाकाहारी संदर्भ में लोग कहते थे कि पनीर को 65 दिनों की विशेष प्रक्रिया से तैयार किया जाता था। लेकिन वैज्ञानिक और व्यावहारिक रूप से यह दोनों ही बातें गलत और बेबुनियाद साबित होती हैं।

3. आर्मी कैंटीन का ‘मेन्यू नंबर 65’

एक और दिलचस्प कहानी भारतीय सेना के जवानों से जुड़ी है। कहा जाता है कि दक्षिण भारत की एक आर्मी कैंटीन के मेन्यू कार्ड में इस तीखे और चटपटे स्टार्टर का नंबर 65 था। सैनिक जब भी कैंटीन आते, तो लंबी डिश का नाम पढ़ने के बजाय सीधे ‘नंबर 65′ ऑर्डर कर देते थे। धीरे-धीरे सैनिकों के बीच यह नाम इतना लोकप्रिय हो गया कि रेस्टोरेंट्स ने इसका नाम ही ’65’ रख दिया।

Paneer 65
Paneer 65

होटल बुहारी का दिलचस्प ‘नंबर गेम’

बुहारी होटल के मालिक ए. एम. बुहारी केवल एक बेहतरीन शेफ ही नहीं थे, बल्कि वे एक चतुर बिजनेसमैन और मार्केटर भी थे। जब 1965 में ‘चिकन 65’ सुपरहिट हो गया, तो उन्होंने इस नंबर गेम को आगे बढ़ाया।

Paneer 65
Paneer 65

इसके बाद उन्होंने अपने मेन्यू में कुछ नए प्रयोग किए और उनके नाम रखे:

  • चिकन 78 (साल 1978 में खोजी गई डिश)
  • चिकन 82 (साल 1982 में खोजी गई डिश)
  • चिकन 90 (साल 1990 में खोजी गई डिश)

हालांकि, जो लोकप्रियता और प्यार ’65’ को मिला, वह बाकी के नंबर्स को नहीं मिल पाया। यही वजह है कि आज भी दुनिया भर में केवल ’65’ सीरीज (चिकन 65, पनीर 65, गोभी 65, आलू 65) ही राज कर रही है।

Paneer 65
Paneer 65

क्यों इतना फेमस है पनीर 65?

पनीर 65 के इतना लोकप्रिय होने के पीछे कई बड़े कारण हैं जो इसे अन्य पनीर स्टार्टर्स (जैसे पनीर टिक्का या कढ़ाई पनीर) से बिल्कुल अलग बनाते हैं: Paneer 65

Paneer 65
Paneer 65
  1. टेक्सचर का अनोखा संगम: पनीर 65 को बनाने के लिए पनीर के टुकड़ों को कॉर्नफ्लोर, मैदा और मसालों के घोल में लपेटकर डीप फ्राई किया जाता है। इससे यह बाहर से बेहद क्रिस्पी (कुरकुरा) और अंदर से एकदम सॉफ्ट और जूसी रहता है।
  2. साउथ इंडियन तड़का: इस डिश की असली जान इसका तड़का है। फ्राई करने के बाद पनीर को दही, कढ़ी पत्ता, राई, ढेर सारी हरी मिर्च और लहसुन के साथ टॉस किया जाता है। दही की खटास और कढ़ी पत्ते की खुशबू इसे एक लाजवाब फ्लेवर देती है।
  3. झटपट तैयार होना: रेस्टोरेंट्स और पार्टियों के लिए यह एक बेहतरीन और क्विक रेसिपी है, जिसे बहुत कम समय में मेहमानों के सामने परोसा जा सकता है।

तो अगली बार जब आपके सामने गरमा-गरम, लाल-चटक और कढ़ी पत्ते की खुशबू से महकता हुआ पनीर 65 आए, तो आपको पता होगा कि आप सिर्फ एक डिश नहीं खा रहे हैं, बल्कि आप चेन्नई के साल 1965 के एक ऐतिहासिक और सफल फूड एक्सपेरिमेंट के इतिहास का स्वाद ले रहे हैं!


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