3Fs Formula: वैश्विक संकट के बीच वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने दिया ‘3Fs’ का मंत्र, जानिए देश की अर्थव्यवस्था को बचाने वाला यह फॉर्मूला
3Fs Formula: पश्चिम एशिया संकट और महंगे कच्चे तेल के बीच केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने भारतीय अर्थव्यवस्था की मजबूती के लिए ‘3Fs’ (Fuel, Fertiliser, Forex) फॉर्मूले पर फोकस करने की बात कही है। जानिए आम जनता, MSMEs और देश के विदेशी मुद्रा भंडार पर इसका क्या असर होगा।
वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें और पश्चिम एशिया का तनाव भारतीय बाजार के लिए बड़ी चुनौती बन रहा है। इस बीच वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने सरकार का ध्यान '3Fs' फॉर्मूले पर केंद्रित करने की बात कही है। क्या है यह फॉर्मूला और कैसे बचाएगा हमारी जेब?
वैश्विक संकट के बीच भारत की नजर ‘3Fs’ पर: वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने समझाया सरकार का नया एक्शन प्लान
दुनिया भर में चल रहे भू-राजनीतिक संकट (Geopolitical Crisis), विशेषकर पश्चिम एशिया (Middle East) में बढ़ते तनाव और ईरान संकट के चलते वैश्विक ऊर्जा बाजार में भारी उथल-पुथल मची हुई है। इस अंतरराष्ट्रीय तनाव का सीधा असर भारत जैसे विकासशील और कच्चे तेल के बड़े आयातक देश पर पड़ रहा है। लगातार महंगे होते जा रहे क्रूड ऑयल के कारण भारत में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में लगातार बढ़ोतरी दर्ज की जा रही है, जिससे माल ढुलाई महंगी हो रही है और बाकी जरूरी चीजों के दाम भी बढ़ रहे हैं।

इस गंभीर वैश्विक चुनौती के बीच, केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने मुंबई में आयोजित एक कार्यक्रम (SIDBI के 37वें स्थापना दिवस) में शिरकत करते हुए देश की आर्थिक स्थिति और सरकार की आगामी रणनीति पर विस्तार से बात की। वित्त मंत्री ने स्पष्ट किया कि भले ही भारत की आंतरिक अर्थव्यवस्था बेहद मजबूत और लचीली (Resilient) है, लेकिन बाहरी मोर्चे से आने वाले झटकों को कम करने के लिए सरकार इस समय ‘3Fs’ फॉर्मूले पर सबसे ज्यादा फोकस कर रही है।
क्या है वित्त मंत्री का ‘3Fs’ फॉर्मूला?
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने समझाया कि वर्तमान वैश्विक परिदृश्य में भारत के बाहरी क्षेत्र (External Sector) और आयात बिल पर सबसे ज्यादा दबाव तीन चीजों की वजह से आ रहा है। इन तीनों को उन्होंने ‘3Fs’ का नाम दिया है:
- Fuel (ईंधन/कच्चा तेल): भारत अपनी जरूरत का लगभग 80-85% कच्चा तेल विदेशों से आयात करता है। पश्चिम एशिया में तनाव और स्ट्रेट ऑफ होर्मुज (Strait of Hormuz) जैसी मुख्य समुद्री व्यापारिक लाइनों में रुकावट के कारण कच्चे तेल की कीमतें आसमान छू रही हैं। भारत के तेल खुदरा विक्रेताओं ने इस नुकसान की भरपाई के लिए हाल ही में पेट्रोल-डीजल की कीमतों में लगातार बढ़ोतरी की है। ईंधन महंगा होने से पूरी सप्लाई चेन प्रभावित होती है।
- Fertiliser (उर्वरक/खाद): वैश्विक संकट के कारण अंतरराष्ट्रीय स्तर पर खादों और उनके कच्चे माल की कीमतों में ‘अकल्पनीय उछाल’ आया है। भारत एक कृषि प्रधान देश है, इसलिए किसानों को सस्ती दरों पर खाद उपलब्ध कराने के लिए सरकार को भारी सब्सिडी देनी पड़ रही है। खाद की बढ़ती कीमतें सरकारी खजाने और राजकोषीय घाटे पर सीधा दबाव डाल रही हैं।
- Forex / Foreign Exchange (विदेशी मुद्रा भंडार): ऊपर बताए गए दोनों ‘Fs’ (ईंधन और उर्वरक) का भुगतान भारत को अमेरिकी डॉलर यानी विदेशी मुद्रा (Forex) में करना पड़ता है। इसके अलावा, भारतीयों द्वारा सोने (Gold) का अत्यधिक आयात भी विदेशी मुद्रा भंडार को तेजी से कम कर रहा है। यही वजह है कि सरकार विदेशी मुद्रा के संरक्षण पर विशेष ध्यान दे रही है।

3Fs Formula प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ‘विदेशी मुद्रा संरक्षण’ अपील का किया समर्थन
3Fs Formula वित्त मंत्री ने अपने संबोधन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा हाल ही में देशवासियों से की गई उस अपील का पुरजोर समर्थन किया, जिसमें पीएम ने नागरिकों से गैर-जरूरी विदेशी खर्चों और सोने की अंधाधुंध खरीदारी से बचने का आग्रह किया था।
वित्त मंत्री ने कहा,
“हमें उस संदर्भ को समझना होगा जिसमें प्रधानमंत्री ने विदेशी मुद्रा बचाने की बात कही है। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कच्चे तेल की कीमतें लगातार बदल रही हैं और ऊंचे स्तर पर बनी हुई हैं। ऐसे में देश के फॉरेक्स रिजर्व (विदेशी मुद्रा भंडार) को बचाना और गैर-जरूरी आयातों को टालना देश के आर्थिक हित में बेहद जरूरी है।”
गौरतलब है कि देश के चालू खाते के घाटे (Current Account Deficit) को नियंत्रित रखने के लिए सरकार ने हाल ही में सोना और चांदी पर आयात शुल्क (Import Duty) को भी 6% से बढ़ाकर 15% कर दिया था, ताकि इसके बेतहाशा आयात पर लगाम लगाई जा सके।

‘डर का माहौल’ (Fear-Mongering) बनाने वालों को दिया करारा जवाब
देश में मंदी या आर्थिक संकट की आशंका जताने वाले आलोचकों और विश्लेषकों को आड़े हाथों लेते हुए वित्त मंत्री ने कहा कि भारत में ‘डर का माहौल’ पैदा करने की कोशिश की जा रही है, जो कि पूरी तरह गलत है। उन्होंने भारतीय अर्थव्यवस्था की मजबूती को साबित करने के लिए ठोस आंकड़े (Data Proof) पेश किए: 3Fs Formula
- मजबूत GST कलेक्शन: वित्त मंत्री ने बताया कि वित्त वर्ष 2025-26 में देश का कुल ग्रॉस जीएसटी कलेक्शन रिकॉर्ड 22 लाख करोड़ रुपये को पार कर गया है, जो पिछले वर्ष की तुलना में 8.3% अधिक है। यह इस बात का सीधा प्रमाण है कि देश के भीतर आर्थिक गतिविधियां और घरेलू मांग बेहद शानदार स्थिति में हैं।
- स्वस्थ बैंकिंग सेक्टर: सरकारी बैंकों का ग्रॉस एनपीए (NPA) घटकर महज 1.93% रह गया है। इसके अलावा, रिटेल लोन (18.1%), कृषि लोन (15.5%) और एमएसएमई लोन (18.2%) में दो अंकों की मजबूत वृद्धि देखी जा रही है।
- कॉर्पोरेट और निजी निवेश: भारतीय कॉर्पोरेट जगत का चौथी तिमाही का प्रॉफिट मार्जिन पिछले 5 वर्षों में सबसे ऊंचे स्तर पर पहुँच गया है। साथ ही, निजी क्षेत्र का पूंजीगत व्यय (Private Capex) भी तेजी से बढ़ रहा है।
आम जनता और MSMEs को बचाने के लिए सरकार के कदम
3Fs Formula निर्मला सीतारमण ने भरोसा दिलाया कि भले ही संकट बाहरी है, लेकिन सरकार का पूरा प्रयास देश के आम नागरिकों, छोटे व्यापारियों (MSMEs) और निर्यातकों को इस वैश्विक झटके से सुरक्षित रखना है।
उन्होंने एमएसएमई सेक्टर को बड़ी राहत देते हुए सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों (PSUs) को कड़े निर्देश दिए कि वे छोटे व्यापारियों का बकाया भुगतान 45 दिनों की समय सीमा के भीतर हर हाल में करें, क्योंकि इस समय छोटे उद्योगों का करीब 8.1 लाख करोड़ रुपये का भुगतान फंसा हुआ है, जिससे उनकी वर्किंग कैपिटल पर असर पड़ रहा है।
निष्कर्ष: वित्त मंत्री के इस बयान से साफ है कि वैश्विक संकट के कारण पेट्रोल, डीजल और घरेलू बाजार पर दबाव जरूर है और सरकार वित्तीय मोर्चे पर फूंक-फूंक कर कदम रख रही है (Calibrated Response), लेकिन देश की आंतरिक आर्थिक सेहत पूरी तरह सुरक्षित और पटरी पर है।
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