हिमालय का जादुई फल: सी-बकथॉर्न (Sea Buckthorn) जो है सेहत का खजाना
Sea Buckthorn: क्या आप हिमालय की यात्रा पर जा रहे हैं? तो लद्दाख और स्पीति के पहाड़ों में मिलने वाले चमत्कारी फल सी-बकथॉर्न (Himalayan Berry) को खाना न भूलें। जानिए इसके फायदे और इतिहास।
Sea Buckthorn: क्या आप हिमालय की वादियों में घूमने जा रहे हैं? 🏔️ तो वहां मिलने वाले इस 'जादुई पीले फल' को चखना मत भूलना! इसे कहते हैं सी-बकथॉर्न (Sea Buckthorn)—हिमालय का असली सोना। -40°C की हाड़ कंपाने वाली ठंड में भी शान से उगता है यह सुपरफूड! 🍊 विटामिन C और ओमेगा फैटी एसिड से भरपूर 'सी-बकथॉर्न' की कहानी और इसके लाजवाब फायदे।

हिमालय का ‘संजीवनी’ फल — सी-बकथॉर्न (Sea Buckthorn)
जब हम हिमालय, लद्दाख या स्पीति घाटी की यात्रा की योजना बनाते हैं, तो हमारे दिमाग में बर्फ से ढके पहाड़, खूबसूरत वादियां और शांत मठ (Monasteries) आते हैं। लेकिन इन ठंडे रेगिस्तानों की पथरीली और सूखी जमीन पर एक ऐसा कुदरती करिश्मा उगता है, जिसे स्थानीय लोग “वंडर बेरी” या “लद्दाख का सोना” कहते हैं। इसका वैज्ञानिक नाम है सी-बकथॉर्न (Sea Buckthorn), और इसे आम भाषा में हिमालयन बेरी भी कहा जाता है।
यदि आप आने वाले दिनों में हिमालय के ऊंचे क्षेत्रों की यात्रा पर जा रहे हैं, तो इस छोटे से नारंगी-पीले रंग के फल को चखना और इसका जूस पीना बिल्कुल न भूलें। आइए जानते हैं कि कंटीली झाड़ियों के बीच उगने वाला यह छोटा सा फल पूरी दुनिया में सुपरफूड के नाम से क्यों मशहूर हो रहा है।
सी-बकथॉर्न का दिलचस्प इतिहास: घोड़ों की चमक से चंगेज खान तक
Sea Buckthorn इस पौधे का वानस्पतिक नाम हिप्पोफे रैनोइड्स (Hippophae rhamnoides) है। ग्रीक भाषा में ‘हिप्पो’ का मतलब होता है घोड़ा और ‘फे’ का मतलब होता है चमकना।
एक प्राचीन कहानी के अनुसार:
प्राचीन ग्रीस (यूनान) में युद्ध के बाद जब बीमार और घायल घोड़ों को
जंगलों में लावारिस छोड़ दिया गया, तो उन्होंने इन झाड़ियों के फल और पत्तियां खाना शुरू कर दिया। कुछ ही दिनों में वे घोड़े न सिर्फ पूरी तरह स्वस्थ हो गए, बल्कि उनके शरीर पर गजब की ताकत आ गई और उनकी त्वचा व बाल सोने की तरह चमकने लगे। तभी से इसका नाम ‘हिप्पोफे’ पड़ा।
इतना ही नहीं, मंगोलिया के महान शासक चंगेज खान अपनी सेना की ताकत और फुर्ती बढ़ाने के लिए अपने सैनिकों और घोड़ों को नियमित रूप से सी-बकथॉर्न खिलाते थे। भारतीय आयुर्वेद और तिब्बती चिकित्सा पद्धति ‘सोवा रिग्पा’ (Sowa-Rigpa) में सदियों से इसका उपयोग फेफड़ों, दिल और त्वचा की बीमारियों को ठीक करने के लिए किया जा रहा है।
यह फल इतना खास क्यों है? (Nutritional Powerhouse) Sea Buckthorn
हिमालय की ऊंचाइयों पर (लगभग 10,000 फीट से अधिक) ऑक्सीजन की कमी होती है, यूवी किरणें (UV Rays) बहुत तेज होती हैं और तापमान माइनस 30 से 40 डिग्री सेल्सियस तक चला जाता है। ऐसे क्रूर मौसम में भी यह पौधा न सिर्फ जिंदा रहता है, बल्कि विटामिंस का भंडार अपने भीतर समेट लेता है।
सी-बकथॉर्न को पोषक तत्वों का ‘डायनामाइट’ कहा जा सकता है: Sea Buckthorn
- विटामिन C का राजा: इसमें संतरे की तुलना में 12 गुना ज्यादा विटामिन C होता है। यह आपकी इम्युनिटी को पल भर में बूस्ट कर सकता है।
- दुर्लभ ओमेगा फैटी एसिड: यह दुनिया के उन चुनिंदा पौधों में से एक है, जिसमें ओमेगा-3, 6, 9 और सबसे दुर्लभ ओमेगा-7 (Omega-7) फैटी एसिड एक साथ पाए जाते हैं। ओमेगा-7 त्वचा और वजन को नियंत्रित रखने के लिए चमत्कारी माना जाता है।
- एंटीऑक्सीडेंट्स की भरमार: इसमें 190 से ज्यादा बायो-एक्टिव कम्पाउंड्स, विटामिन E, विटामिन A, अमीनो एसिड और प्रचुर मात्रा में मिनरल्स होते हैं।

हिमालय यात्रा के दौरान सी-बकथॉर्न खाना क्यों जरूरी है?
Sea Buckthorn जब आप दिल्ली, मुंबई या अहमदाबाद जैसे मैदानी इलाकों से सीधे लद्दाख (Leh) या स्पीति (Spiti) पहुंचते हैं, तो शरीर को वहां के कम ऑक्सीजन वाले माहौल में ढलने में समय लगता है। इसे ‘एक्यूट माउंटेन सिकनेस’ (AMS) कहते हैं, जिससे सिरदर्द, उल्टी और थकान होती है।
- माउंटेन सिकनेस से राहत: सी-बकथॉर्न शरीर में ऑक्सीजन के स्तर को सुधारने और ब्लड सर्कुलेशन को बेहतर बनाने में मदद करता है। यात्रा के दौरान इसका जूस पीने से थकान तुरंत दूर होती है।
- कड़ाके की ठंड से सुरक्षा: यह शरीर में अंदरूनी गर्मी पैदा करता है और पहाड़ों की सूखी, बर्फीली हवाओं से होने वाले सर्दी-जुकाम से बचाता है।
- त्वचा को यूवी किरणों से बचाए: पहाड़ों में यूवी किरणें त्वचा को झुलसा देती हैं। सी-बकथॉर्न में मौजूद विटामिन E और एंटीऑक्सीडेंट्स त्वचा को सनबर्न और रूखेपन से बचाते हैं।


सी-बकथॉर्न के मुख्य स्वास्थ्य लाभ (Health Benefits)
| फायदा | यह कैसे काम करता है? |
|---|---|
| दिल के लिए वरदान | इसमें मौजूद ओमेगा फैटी एसिड खराब कोलेस्ट्रॉल (LDL) को कम करते हैं और ब्लड प्रेशर को कंट्रोल में रखते हैं। |
| दमकती त्वचा (Glowing Skin) | इसके बीज और फल के तेल का इस्तेमाल एंटी-एजिंग क्रीम और सीरम में होता है। यह झुर्रियों और मुंहासों को जड़ से खत्म करता है। |
| पाचन क्रिया में सुधार | ओमेगा-7 गैस्ट्रिक ट्रैक्ट की अंदरूनी परत को मजबूत करता है, जिससे अल्सर और एसिडिटी की समस्या नहीं होती। |
| कैंसर से बचाव | इसमें मौजूद फ्लेवोनोइड्स शरीर में कैंसर कोशिकाओं को पनपने से रोकते हैं और इम्युनिटी को अचूक बनाते हैं। |

यात्रा के दौरान इसे कहां और कैसे खोजें?
यदि आप लेह-लद्दाख, नुब्रा वैली, पैंगोंग त्सो, या हिमाचल के लाहौल-स्पीति और किन्नौर जा रहे हैं, तो आपको रास्तों के किनारे कंटीली झाड़ियों पर छोटे-छोटे पीले और नारंगी रंग के गुच्छेदार फल लटके हुए दिखाई देंगे।
- ताजा फल: अगर आप अगस्त से अक्टूबर के बीच जा रहे हैं, तो यह इनके पकने का सही समय होता है। आप इन्हें सीधे झाड़ी से तोड़कर खा सकते हैं (ध्यान रहे, कांटे बहुत तीखे होते हैं)। इनका स्वाद काफी खट्टा और थोड़ा कसैला-मीठा होता है।
- लेह बेरी जूस (Leh Berry Juice): लद्दाख के स्थानीय बाजारों में इसका ताजा और पैकेज्ड जूस आसानी से मिल जाता है। लद्दाखी लोग सैलानियों का स्वागत अक्सर इसी जूस से करते हैं।
- सी-बकथॉर्न चाय (Tea): इसकी पत्तियों से बनी हर्बल चाय पहाड़ों की ठंड में अमृत जैसी लगती है।
निष्कर्ष
भारतीय वैज्ञानिकों (DRDO और ISRO) ने भी माना है कि सी-बकथॉर्न की खूबियों के कारण यह हमारे सैनिकों के लिए अत्यधिक ऊंचाई वाले क्षेत्रों में बेहद मददगार साबित होता है। तो अगली बार जब आप हिमालय की बर्फीली वादियों की सैर पर निकलें, तो केवल रील्स बनाने और फोटो खींचने में न खो जाएं। प्रकृति के इस अनमोल और दुर्लभ तोहफे ‘सी-बकथॉर्न’ को अपनी यात्रा का हिस्सा जरूर बनाएं। इसका एक घूंट आपको पहाड़ों पर भी घर जैसी ताजगी और असीमित ऊर्जा से भर देगा!
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