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राजकोट पहुंचे Baba Bageshwar: धीरेंद्र शास्त्री का विरोधियों को करारा जवाब, जानें पाटीदार समाज के विरोध और ‘दिव्य दरबार’ पर छिड़े विवाद

राजकोट पहुंचे Baba Bageshwar: धीरेंद्र शास्त्री का विरोधियों को करारा जवाब, जानें पाटीदार समाज के विरोध और ‘दिव्य दरबार’ पर छिड़े विवाद

Baba Bageshwar राजकोट आगमन पर पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने विरोधियों को करारा जवाब देते हुए कहा कि धर्म परिवर्तन रोकने के कारण उन पर टिप्पणियां की जा रही हैं। जानिए पाटीदार नेताओं के विरोध और इस पूरे विवाद की इनसाइड स्टोरी।

राजकोट पहुंचते ही विरोधियों पर बरसे Baba Bageshwar : ‘धर्म परिवर्तन रोक रहा हूँ, इसलिए निशाना बनाया जा रहा है’

राजकोट: बागेश्वर धाम के पीठाधीश्वर पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री (बाबा बागेश्वर) अपने ‘दिव्य दरबार’ और सनातन धर्म के प्रचार को लेकर एक बार फिर देश के सबसे बड़े सियासी और सामाजिक विवाद के केंद्र में आ गए हैं। गुजरात के राजकोट पहुंचते ही हवाई अड्डे पर मीडिया से बात करते हुए उन्होंने अपने विरोधियों को कड़ा और सीधा संदेश दिया। धीरेंद्र शास्त्री ने कहा कि वे देश में हो रहे अवैध धर्म परिवर्तन और घर वापसी के अभियानों पर काम कर रहे हैं, यही वजह है कि कुछ ताकतें और विरोधी उनके पीछे पड़े हैं और उन पर अनर्गल टिप्पणियां कर रहे हैं।

Baba Bageshwar
Baba Bageshwar

दूसरी तरफ, गुजरात के एक प्रमुख पाटीदार नेता ने प्रशासन से मांग की है कि धीरेंद्र शास्त्री के ‘दिव्य दरबार’ को तुरंत बंद किया जाए। इस मांग के बाद गुजरात का माहौल गर्मा गया है। आइए विस्तार से समझते हैं कि आखिर अतीत में ऐसा क्या हुआ था, जिसने बाबा बागेश्वर के खिलाफ इतने विरोधी खड़े कर दिए और राजकोट में इस बार विवाद की असली वजह क्या है।

क्या हुआ था पहले? क्यों बाबा के विरोधी बन गए लोग?

Baba Bageshwar पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री का विवादों से चोली-दामन का साथ रहा है। उनके अचानक इतने विरोधी बनने के पीछे कई पुरानी घटनाएं और उनके द्वारा दिए गए बयान हैं, जिन्होंने समय-समय पर विभिन्न समुदायों और तर्कवादियों को नाराज किया:

1. नागपुर की अंधश्रद्धा उन्मूलन समिति का चैलेंज

बाबा बागेश्वर के बड़े पैमाने पर राष्ट्रव्यापी विरोध की शुरुआत महाराष्ट्र के नागपुर से हुई थी। वहां ‘अंधश्रद्धा उन्मूलन समिति’ के श्याम मानव ने धीरेंद्र शास्त्री को अपने चमत्कार (पर्चा लिखना) को साबित करने की चुनौती दी थी और उनके खिलाफ जादू-टोना विरोधी कानून के तहत मामला दर्ज कराने की मांग की थी। हालांकि बाबा के समर्थकों ने इसे सनातन धर्म पर हमला बताया, लेकिन इस घटना के बाद से बुद्धिजीवियों और तर्कवादियों का एक बड़ा वर्ग उनके खिलाफ लामबंद हो गया।

2. संतों और महापुरुषों पर विवादित टिप्पणियां

अतीत में धीरेंद्र शास्त्री ने कथाओं के दौरान कुछ ऐसे बयान दिए जिससे धार्मिक और सामाजिक भावनाएं आहत हुईं: Baba Bageshwar

  • संत तुकाराम विवाद: महाराष्ट्र के पूजनीय संत तुकाराम महाराज और उनकी पत्नी को लेकर धीरेंद्र शास्त्री ने एक विवादित टिप्पणी की थी, जिसके बाद पूरे महाराष्ट्र में उनका भारी विरोध हुआ और बाद में बाबा को वीडियो जारी कर माफी मांगनी पड़ी थी।
  • हैहयवंशी समाज (भगवान कार्तवीर्य अर्जुन) विवाद: एक कथा में उन्होंने भगवान कार्तवीर्य अर्जुन और हैहयवंश को लेकर कुछ ऐसी बातें कहीं, जिससे कलचुरी और हैहयवंशी समाज के लोग सड़कों पर उतर आए और देश के कई हिस्सों में बाबा के खिलाफ एफआईआर (FIR) दर्ज कराने की मांग की गई।

3. ‘चमत्कार’ बनाम ‘अंधविश्वास’ की बहस

धीरेंद्र शास्त्री के दिव्य दरबार में लोगों की समस्याओं को बिना बताए पर्चे पर लिख देने के दावे को विरोधी ‘माइंड रीडिंग’ या ‘अंधविश्वास को बढ़ावा देना’ कहते हैं। विरोधियों का मानना है कि ऐसे दरबारों से समाज में वैज्ञानिक दृष्टिकोण (Scientific Temper) खत्म होता है और लोग अंधविश्वास के शिकार बनते हैं।

Baba Bageshwar
Baba Bageshwar

राजकोट में नया विवाद: पाटीदार समाज क्यों हुआ नाराज?

Baba Bageshwar राजकोट दौरे के समय धीरेंद्र शास्त्री का सबसे प्रखर विरोध पाटीदार (पटेल) समुदाय के कुछ नेताओं की तरफ से देखने को मिल रहा है। इस विरोध की मुख्य वजह भी बाबा का एक पुराना बयान ही है।

विवाद की जड़:

कुछ समय पहले एक मंच से धीरेंद्र शास्त्री ने पाटीदार समाज की कुलदेवी ‘मां उमिया’ और ‘मां खोडल’ को लेकर एक ऐसी टिप्पणी कर दी थी, जिसे पाटीदार समाज ने अपनी आस्था और अस्मिता का अपमान माना। हालांकि, विवाद बढ़ने पर बाबा बागेश्वर ने स्पष्टीकरण देते हुए कहा था कि उनका इरादा किसी की कुलदेवी का अपमान करना नहीं था और वे सभी देवियों का सम्मान करते हैं।

इसके बावजूद, पाटीदार नेताओं का गुस्सा शांत नहीं हुआ है। राजकोट के पाटीदार नेताओं का कहना है कि अंधविश्वास फैलाने वाले और हमारी कुलदेवी पर टिप्पणी करने वाले व्यक्ति का दिव्य दरबार गुजरात की धरती पर नहीं होना चाहिए। उन्होंने स्थानीय प्रशासन को पत्र लिखकर इस कार्यक्रम को रद्द करने की मांग की है।

“हम धर्म परिवर्तन रोक रहे हैं…” –Baba Bageshwar की सफाई

इन तमाम विरोधों और पाटीदार नेताओं के बयानों के बीच जैसे ही धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री राजकोट पहुंचे, उन्होंने आक्रामक रुख अपनाते हुए विरोधियों को आड़े हाथों लिया।

उन्होंने पत्रकारों से कहा: Baba Bageshwar

“जो लोग मेरा विरोध कर रहे हैं, वे असल में मेरा विरोध नहीं कर रहे, बल्कि उस सनातन कार्य का विरोध कर रहे हैं जो मैं कर रहा हूँ। हम जंगलों और आदिवासी इलाकों में जाकर उन गरीब हिंदुओं को वापस अपने धर्म में ला रहे हैं जिनका लालच देकर धर्म परिवर्तन करा दिया गया था। हम ‘घर वापसी’ करा रहे हैं और लव जिहाद के खिलाफ आवाज उठा रहे हैं। यही बात कुछ लोगों को हजम नहीं हो रही है, इसलिए वे टिप्पणियां कर रहे हैं और दरबार बंद कराने की मांग कर रहे हैं।”

धीरेंद्र शास्त्री ने साफ किया कि वे न तो किसी विरोध से डरते हैं और न ही अपना ‘दिव्य दरबार’ बंद करेंगे। उन्होंने कहा कि गुजरात के लाखों लोग उनसे प्यार करते हैं और कुछ मुट्ठी भर लोगों के विरोध से सनातन की यात्रा नहीं रुकेगी।

आगे क्या?

राजकोट में बाबा बागेश्वर के कार्यक्रम को लेकर सुरक्षा व्यवस्था बेहद सख्त कर दी गई है। स्थानीय पुलिस और खुफिया एजेंसियां अलर्ट पर हैं ताकि समर्थकों और विरोधियों के बीच किसी भी तरह का टकराव न हो। यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या पाटीदार समाज का यह विरोध राजनीतिक रूप लेता है या बाबा बागेश्वर हमेशा की तरह इस बार भी अपने आलोचकों को शांत करने में सफल रहते हैं।


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