G-7 Summit 2026: फ्रांस के एवियन में जुटे दुनिया के दिग्गज नेता; PM नरेंद्र मोदी ने वर्किंग सेशन और ‘फैमिली फोटो’ में लिया हिस्सा
G-7 Summit 2026: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने फ्रांस के एवियन में आयोजित G-7 शिखर सम्मेलन के वर्किंग सेशन में भाग लिया। वैश्विक नेताओं के साथ ‘फैमिली फोटो’ में शामिल होकर PM मोदी ने भारत के बढ़ते वैश्विक प्रभाव को रेखांकित किया।
वैश्विक मंच पर भारत की धमक! प्रधानमंत्री @narendramodi ने फ्रांस के एवियन में G-7 शिखर सम्मेलन के वर्किंग सेशन में हिस्सा लिया। दुनिया के शीर्ष नेताओं के साथ 'फैमिली फोटो' में PM मोदी की मौजूदगी भारत के बढ़ते रणनीतिक कद को दर्शाती है।
G-7 Summit 2026: फ्रांस के एवियन में प्रधानमंत्री मोदी की वैश्विक कूटनीति, वर्किंग सेशन और ‘फैमिली फोटो’ में हुए शामिल

G-7 Summit 2026 एवियन (फ्रांस): ग्लोबल डिप्लोमेसी और वैश्विक मंच पर भारत की मजबूत स्थिति को एक बार फिर दुनिया ने देखा, जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने फ्रांस के सुरम्य शहर एवियन (Evian) में आयोजित G-7 शिखर सम्मेलन के महत्वपूर्ण वर्किंग सेशन में हिस्सा लिया। दुनिया की सात सबसे बड़ी उन्नत अर्थव्यवस्थाओं के इस मंच पर भारत को एक विशेष आमंत्रित (Outreach) देश के रूप में आमंत्रित किया गया है। शिखर सम्मेलन के इतर, प्रधानमंत्री मोदी ने G-7 के सदस्य देशों और अन्य आमंत्रित अंतरराष्ट्रीय संगठनों व राष्ट्र प्रमुखों के साथ पारंपरिक ‘फैमिली फोटो’ (पारिवारिक तस्वीर) में भी हिस्सा लिया, जो वैश्विक राजनीति में भारत के केंद्रीय महत्व को प्रदर्शित करता है।
वर्किंग सेशन में गूंजी भारत की आवाज: वैश्विक चुनौतियों पर चर्चा
G-7 Summit 2026: एवियन में आयोजित इस उच्च स्तरीय वर्किंग सेशन के दौरान, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने दुनिया के सामने मौजूद सबसे गंभीर संकटों पर भारत का दृष्टिकोण साझा किया। बैठक में वैश्विक आर्थिक सुधार, जलवायु परिवर्तन (Climate Change), सतत विकास (Sustainable Development), और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) व डिजिटल गवर्नेंस जैसे आधुनिक विषयों पर गहन मंथन हुआ।
प्रधानमंत्री मोदी ने सत्र को संबोधित करते हुए कहा कि आज की दुनिया को टकराव के बजाय सहयोग की आवश्यकता है। उन्होंने ‘ग्लोबल साउथ’ (विकासशील और गरीब देशों) की चिंताओं को प्रमुखता से उठाते हुए कहा कि वैश्विक खाद्य सुरक्षा, ऊर्जा संकट और ऋण (Debt) की समस्याओं से निपटने के लिए समावेशी दृष्टिकोण अपनाना बेहद जरूरी है। भारत ने हमेशा से ‘वसुधैव कुटुंबकम’ (दुनिया एक परिवार है) की भावना के साथ काम किया है, और आज भी भारत वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला (Supply Chain) को मजबूत और लचीला बनाने में अपना योगदान दे रहा है।




वैश्विक दिग्गजों के साथ ‘फैमिली फोटो’
G-7 Summit 2026: शिखर सम्मेलन के सबसे प्रतीक्षित क्षणों में से एक ‘फैमिली फोटो’ का सत्र रहा। फ्रांस के राष्ट्रपति द्वारा आयोजित इस विशेष सत्र में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी वैश्विक नेताओं के साथ बेहद गर्मजोशी के साथ खड़े नजर आए। इस तस्वीर में अमेरिका, ब्रिटेन, फ्रांस, जर्मनी, इटली, कनाडा और जापान के राष्ट्राध्यक्षों के साथ-साथ दुनिया के अन्य चुनिंदा देशों के नेता शामिल थे।
इस सामूहिक तस्वीर में प्रधानमंत्री मोदी की केंद्रीय उपस्थिति इस बात का प्रतीक है कि वैश्विक संकटों के समाधान और अंतरराष्ट्रीय नीतियों के निर्धारण में भारत की भागीदारी को अब अपरिहार्य माना जाता है। सोशल मीडिया पर इस तस्वीर को भारत के वैश्विक नेतृत्व के एक सशक्त प्रमाण के रूप में देखा जा रहा है।
द्विपक्षीय मुलाकातों का दौर: फ्रांस और भारत के रिश्ते मजबूत
G-7 वर्किंग सेशन के अलावा, प्रधानमंत्री मोदी ने समिट के मेजबान और फ्रांस के राष्ट्रपति के साथ एक महत्वपूर्ण द्विपक्षीय बैठक भी की। भारत और फ्रांस के बीच रणनीतिक साझेदारी (Strategic Partnership) हमेशा से मजबूत रही है, और इस मुलाकात ने इसे एक नई दिशा दी है। दोनों नेताओं ने रक्षा, अंतरिक्ष, नवीकरणीय ऊर्जा (Renewable Energy) और हिंद-प्रशांत (Indo-Pacific) क्षेत्र में सुरक्षा सहयोग बढ़ाने पर सहमति जताई।
इसके साथ ही, प्रधानमंत्री ने अन्य वैश्विक नेताओं से भी अनौपचारिक मुलाकातें कीं। इन ‘पुल-असाइड’ बैठकों में व्यापार, तकनीक के हस्तांतरण और आतंकवाद के खिलाफ वैश्विक लड़ाई जैसे मुद्दों पर संक्षिप्त लेकिन महत्वपूर्ण चर्चाएं हुईं।
G-7 Summit 2026: में भारत की मौजूदगी का क्या है महत्व?
हालांकि भारत औपचारिक रूप से G-7 (ग्रुप ऑफ सेवन) का सदस्य नहीं है, लेकिन पिछले कुछ वर्षों से भारत को लगातार इस शिखर सम्मेलन में एक विशेष भागीदार के रूप में आमंत्रित किया जा रहा है। रणनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि इसके पीछे कई बड़े कारण हैं:
1.आर्थिक महाशक्ति: भारत दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में से एक है। वैश्विक मंदी के दौर में भी भारत की विकास दर स्थिर बनी हुई है। 2. भू-राजनीतिक संतुलन: एशिया और हिंद-प्रशांत क्षेत्र में स्थिरता बनाए रखने के लिए पश्चिमी देश भारत को एक बेहद विश्वसनीय और मजबूत साझेदार मानते हैं। 3. ग्लोबल साउथ की आवाज: भारत खुद को विकासशील देशों की आवाज के रूप में स्थापित कर चुका है, जिससे G-7 जैसे मंचों को एक व्यापक और संतुलित दृष्टिकोण मिलता है।
निष्कर्ष
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की फ्रांस के एवियन में G-7 वर्किंग सेशन और फैमिली फोटो में यह भागीदारी भारत की ‘विश्वमित्र’ वाली छवि को और सुदृढ़ करती है। यह दौरा न केवल भारत की कूटनीतिक सफलताओं की कड़ी में एक और मील का पत्थर है, बल्कि यह यह भी साबित करता है कि वर्तमान वैश्विक व्यवस्था में भारत की सक्रिय भागीदारी के बिना किसी भी बड़े अंतरराष्ट्रीय मुद्दे का समाधान संभव नहीं है।
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