Donald Trump Statement : अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने फिर दुनिया को चौंकाया। उन्होंने कहा कि उन्हें अंतरराष्ट्रीय कानूनों (International Law) की जरूरत नहीं है और उनके रहते चीन ताइवान पर कब्जा नहीं कर सकता। जानिए ट्रंप के इस ‘सुपरपावर’ रवैये के पीछे की पूरी बात।
“मुझे इंटरनेशनल लॉ की जरूरत नहीं!” डोनाल्ड ट्रंप के इस बयान ने दुनिया भर में हलचल मचा दी है। उनका कहना है कि उन्हें रोकने वाला सिर्फ एक ही शख्स है—वो खुद!
वॉशिंगटन: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप अपनी बेबाकी और पारंपरिक नियमों को तोड़ने के लिए जाने जाते हैं, लेकिन इस बार उनके बयान ने अंतरराष्ट्रीय कूटनीति (Diplomacy) की बुनियाद हिला दी है। एक हालिया साक्षात्कार और संबोधन में ट्रंप ने साफ शब्दों में कहा, “मुझे अंतरराष्ट्रीय कानून (International Law) की जरूरत नहीं है।”
उनका यह बयान न केवल संयुक्त राष्ट्र (UN) जैसी संस्थाओं के लिए झटका है, बल्कि यह अमेरिका की बदलती विदेश नीति का एक स्पष्ट संकेत भी है।


‘सिर्फ मैं ही खुद को रोक सकता हूं’
डोनाल्ड ट्रंप ने अपनी शक्तियों और फैसलों पर बात करते हुए कहा कि दुनिया का कोई भी कानून, संधि या संगठन उन्हें वे फैसले लेने से नहीं रोक सकता जो अमेरिका के हित में हैं। उन्होंने कहा, “मुझे रोकने वाला सिर्फ एक ही आदमी है और वह है- डोनाल्ड ट्रंप। मेरी नैतिकता (Morality) और मेरा दिमाग ही मुझे रोक सकता है, कोई कागज का टुकड़ा नहीं।”
यह बयान ट्रंप की उस विचारधारा को दर्शाता है जिसे वे ‘अमेरिका फर्स्ट’ कहते आए हैं। आलोचकों का मानना है कि अंतरराष्ट्रीय कानूनों को खारिज करना दुनिया को अराजकता की ओर ले जा सकता है, लेकिन ट्रंप के समर्थकों के लिए यह एक मजबूत नेता की निशानी है जो वैश्विक नौकरशाही के आगे नहीं झुकता।

चीन को खुली चुनौती: ताइवान पर नजर मत डालना
Donald Trump Statement ट्रंप ने केवल कानूनों को ही खारिज नहीं किया, बल्कि चीन को भी सख्त लहजे में चेतावनी दी है। ताइवान के मुद्दे पर चल रही वैश्विक तनातनी के बीच ट्रंप ने ऐलान किया कि जब तक वे सत्ता में हैं, चीन ताइवान पर कब्जा करने के बारे में सोच भी नहीं सकता।
उन्होंने कहा, “मेरे रहते चीन ताइवान नहीं लेगा। उन्हें पता है कि मैं क्या कर सकता हूं।” विशेषज्ञों का मानना है कि ट्रंप का यह बयान ‘रणनीतिक अस्पष्टता’ (Strategic Ambiguity) की पुरानी अमेरिकी नीति से हटकर ‘सीधी धमकी’ की ओर इशारा करता है। ट्रंप का मानना है कि उनकी व्यक्तिगत छवि और उनका “अनप्रिडिक्टेबल” (अप्रत्याशित) स्वभाव ही चीन जैसे देशों के लिए सबसे बड़ा डर है।
Donald Trump Statement क्या हैं इसके मायने?
डोनाल्ड ट्रंप का यह कहना कि उन्हें इंटरनेशनल लॉ की जरूरत नहीं है, कई गंभीर सवाल खड़े करता है:
- संप्रभुता बनाम वैश्विक नियम: ट्रंप का मानना है कि अमेरिकी संप्रभुता (Sovereignty) किसी भी अंतरराष्ट्रीय संधि से ऊपर है। अगर कोई नियम अमेरिका के रास्ते में आता है, तो वे उसे मानने के लिए बाध्य नहीं हैं।
- प्रत्यक्ष कार्रवाई (Direct Action): ट्रंप ने अपने कार्यकाल में कई बार दिखाया है कि वे बिना किसी हिचकिचाहट के दूसरे देशों के खिलाफ सख्त कदम उठा सकते हैं—चाहे वह आर्थिक प्रतिबंध हों या सैन्य धमकियां।
- दोस्त और दुश्मन दोनों सतर्क: ट्रंप के इस रवैये से न केवल अमेरिका के दुश्मन (जैसे चीन, ईरान) सतर्क हैं, बल्कि यूरोप और नाटो (NATO) में मौजूद अमेरिका के सहयोगी भी असमंजस में हैं कि क्या अमेरिका अब साझा नियमों का पालन करेगा या नहीं।
Donald Trump Statement —“मैं चाहे जो करूं, मेरी मर्जी”—अंतरराष्ट्रीय राजनीति में एक नए दौर का संकेत है। यह वो दौर है जहां संस्थाओं और लिखित कानूनों की जगह नेताओं के व्यक्तिगत प्रभाव और शक्ति प्रदर्शन को प्राथमिकता दी जा रही है। अब यह देखना दिलचस्प होगा कि दुनिया के बाकी देश, विशेषकर चीन, ट्रंप की इस खुली चुनौती का जवाब कैसे देते हैं। फिलहाल, ट्रंप ने साफ कर दिया है कि व्हाइट हाउस में अब वही नियम चलेंगे, जो डोनाल्ड ट्रंप तय करेंगे।
डोनाल्ड ट्रंप ने नाटो और ग्रीनलैंड के सवाल पर ‘मालिकाना हक’ को किसी भी संधि या समझौते से बेहतर और सफलता के लिए मनोवैज्ञानिक रूप से जरूरी बताया है। उन्होंने यूरोप के रवैये पर तंज कसते हुए कहा कि नाटो देशों से रक्षा खर्च बढ़वाने का श्रेय उन्हें ही जाता है। साथ ही, ट्रंप ने दावा किया कि रूस केवल अमेरिका से डरता है और यदि वे न होते, तो रूस अब तक पूरे यूक्रेन पर कब्जा कर चुका होता।
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