Shramev Jayate पीएम मोदी ने चार नई श्रम संहिताओं के क्रियान्वयन की सराहना की — श्रमिकों के अधिकारों में बड़ा सुधार
Shramev Jayate प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने चार श्रम संहिताओं के देशव्यापी क्रियान्वयन की प्रशंसा करते हुए कहा है कि ये सुधार श्रमिकों के लिए सार्वभौमिक सामाजिक सुरक्षा, समय पर वेतन, सुरक्षित कार्यस्थल और बेहतर अवसरों की मजबूत नींव बनाएंगे।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देश में चार श्रम संहिताओं (Labour Codes) के आज आधिकारिक क्रियान्वयन की सराहना की है। प्रधानमंत्री ने X (पूर्व में Twitter) पर लिखा कि यह एक ऐतिहासिक कदम है, और उन्होंने इन संहिताओं को “स्वाधीनता के बाद के सबसे व्यापक और प्रगतिशील श्रम-सुधारों” में से एक बताया।
यह कदम नारी शक्ति और युवा शक्ति को सामाजिक सुरक्षा, न्यूनतम वेतन और सुरक्षित कार्यस्थल देगा
ये चार संहिताएं हैं:
- वेतन संहिता (Code on Wages)
- औद्योगिक संबंध संहिता (Industrial Relations Code)
- सामाजिक सुरक्षा संहिता (Code on Social Security)
- व्यावसायिक सुरक्षा, स्वास्थ्य एवं कार्य-स्थितियाँ संहिता (Occupational Safety, Health and Working Conditions Code)
Shramev Jayate मोदी ने अपने पोस्ट में कहा कि ये संहिताएं विशेष रूप से नारी शक्ति और युवा शक्ति के लिए लाभदायक होंगी। वे “सार्वजनिक सामाजिक सुरक्षा, न्यूनतम और समय पर वेतन भुगतान, सुरक्षित कार्यस्थल और लाभदायक अवसरों” की मजबूत नींव के रूप में काम करेंगी।
प्रधानमंत्री ने यह भी कहा है कि यह कदम एक भविष्य-तैयार पारिस्थितिकी तंत्र का निर्माण करने में सहायक होगा, जो श्रमिकों के अधिकारों की रक्षा करेगा और देश के आर्थिक विकास को सशक्त बनाएगा। सरकार के अनुसार, इन चार संहिताओं से कुल 29 पुराने श्रम कानूनों को समाहित और सरल बनाया गया है, ताकि नियमों का जाल कम हो और अनुपालन आसान हो सके।
नए नियमों के तहत गिग और प्लेटफॉर्म वर्कर (जैसे अपनी नौकरी ऐप-आधारित काम करने वाले) को भी सामाजिक सुरक्षा का लाभ मिलेगा। इसके अलावा, सभी कामगारों के लिए न्यूनतम वेतन का कानूनी अधिकार तय किया गया है और वेतन समय पर मिलने को सुनिश्चित किया गया है।

मोदी का कहना है कि श्रम सुधार रोजगार, उत्पादकता और आर्थिक विकास को आगे बढ़ाएंगे Shramev Jayate
महिलाओं को काम के सुरक्षित माहौल के लिए विशेष प्रावधान मिले हैं — जैसे कि रात शिफ्ट पर काम की अनुमति है, बशर्ते सुरक्षा सुनिश्चित की जाए। इसके अलावा, सभी श्रमिकों के लिए काम की सुरक्षा बढ़ाने और स्वास्थ्य-जांच को नियमित करने की व्यवस्था भी शामिल है।
मोदी ने यह विश्वास व्यक्त किया कि ये सुधार रोजगार का सृजन, उत्पादकता में वृद्धि, और विकसित भारत की ओर गति को तेज करेंगे। कुछ आलोचकों ने हालांकि सावधानी भी जताई है। उदाहरण के लिए भारतीय मजदूर संघ (BMS) ने चारों संहिताओं को चरणबद्ध तरीके से लागू करने का आग्रह किया है, और कुछ प्रावधानों पर पुनर्विचार की मांग की है।
कुल मिलाकर, प्रधानमंत्री मोदी ने इन श्रम कोड्स को श्रमिक-केंद्रित सुधार के रूप में पेश किया है, जिनका उद्देश्य केवल नियम बदलना नहीं, बल्कि एक सुरक्षित, न्यायपूर्ण और आधुनिक श्रम-इकोसिस्टम बनाना है।
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