महाराष्ट्र की पहली महिला डिप्टी सीएम: कौन हैं Sunetra Pawar? जानें उनकी शिक्षा, राजनीतिक सफर और वह रिकॉर्ड जो आज टूट गया
Sunetra Pawar महाराष्ट्र की पहली महिला उपमुख्यमंत्री बनकर इतिहास रचने जा रही हैं। जानिए उनकी शैक्षिक योग्यता, राजनीतिक अनुभव और शाम 5 बजे होने वाले शपथ ग्रहण समारोह की पूरी जानकारी।
इतिहास रचने की दहलीज पर महाराष्ट्र: Sunetra Pawar होंगी पहली महिला उपमुख्यमंत्री
महाराष्ट्र की राजनीति में आज का दिन यानी 31 जनवरी 2026, एक ऐसी घटना का गवाह बनने जा रहा है, जिसका इंतज़ार दशकों से किया जा रहा था। राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (NCP) की नेता और उपमुख्यमंत्री अजित पवार की पत्नी सुनेत्रा पवार आज शाम 5 बजे पद और गोपनीयता की शपथ लेंगी। वे महाराष्ट्र के इतिहास में पहली महिला उपमुख्यमंत्री बनने का गौरव हासिल करेंगी।


दशकों का रिकॉर्ड टूटा
1960 में महाराष्ट्र राज्य की स्थापना के बाद से आज तक किसी भी महिला ने उपमुख्यमंत्री के पद की शपथ नहीं ली थी। हालांकि राज्य में कई प्रभावशाली महिला नेता रही हैं, लेकिन कैबिनेट के इस दूसरे सबसे महत्वपूर्ण पद तक कोई नहीं पहुँच सका था। सुनेत्रा पवार ने इस ‘ग्लास सीलिंग’ को तोड़कर एक नया कीर्तिमान स्थापित किया है।
Sunetra Pawar: शिक्षा और प्रारंभिक जीवन
सुनेत्रा पवार एक प्रतिष्ठित राजनीतिक पृष्ठभूमि से आती हैं। उनके भाई पद्मसिंह पाटिल राज्य के पूर्व मंत्री रह चुके हैं। अगर उनकी शैक्षिक योग्यता (Educational Qualification) की बात करें तो:
- सुनेत्रा पवार ने अपनी स्नातक (Graduation) की पढ़ाई पूरी की है।
- वे सामाजिक कार्यों में अत्यधिक सक्रिय रही हैं और उनकी प्रशासनिक समझ को बहुत गहरा माना जाता है।
- वह विद्या प्रतिष्ठान (बारामती) जैसी प्रतिष्ठित संस्थाओं के प्रबंधन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती रही हैं, जो उनकी शैक्षिक और बौद्धिक क्षमता का प्रमाण है।
राजनीति और समाजसेवा का सफर Sunetra Pawar
सुनेत्रा पवार को अक्सर ‘साइलेंट वर्कर’ के रूप में जाना जाता है। भले ही वे राजनीति में बहुत अधिक मुखर नहीं रही हों, लेकिन बारामती और आसपास के क्षेत्रों में उनका जमीनी काम बेहद मजबूत है।
- पर्यावरण और जल संरक्षण: उन्होंने ‘एनवायरमेंटल फोरम ऑफ इंडिया’ की स्थापना की और जल संरक्षण के क्षेत्र में काफी काम किया है।
- महिला सशक्तिकरण: स्वयं सहायता समूहों (Self Help Groups) के माध्यम से उन्होंने हज़ारों महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाया है।


चुनाव और राजनीतिक समीकरण
2024 के लोकसभा चुनावों के दौरान सुनेत्रा पवार बारामती सीट से चुनाव लड़ने के बाद काफी चर्चा में रहीं। हालांकि वहां मुकाबला ननद-भाभी (सुप्रिया सुले बनाम सुनेत्रा पवार) के बीच था, लेकिन उस चुनाव ने सुनेत्रा पवार की राजनीतिक महत्वाकांक्षा और संगठन पर उनकी पकड़ को स्पष्ट कर दिया था। अब उन्हें कैबिनेट में शामिल कर पार्टी ने महिलाओं के बीच एक बड़ा संदेश भेजने की कोशिश की है।
अजित पवार जी का हाल ही में हुआ निधन ही वह मुख्य कारण है जिसके चलते राज्य की राजनीति में यह बड़ा फेरबदल हुआ है।
अजित पवार का निधन और राजनीतिक शून्य
महाराष्ट्र की राजनीति के ‘दादा’ कहे जाने वाले अजित पवार का हाल ही में निधन हो गया, जिससे न केवल राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (NCP) बल्कि पूरे महाराष्ट्र में एक बड़ा राजनीतिक शून्य पैदा हो गया। वे सरकार में उपमुख्यमंत्री के पद पर थे और प्रशासन पर उनकी पकड़ बहुत मजबूत थी। उनके आकस्मिक निधन ने पार्टी और परिवार दोनों को गहरे संकट में डाल दिया था।
सुनेत्रा पवार को डिप्टी सीएम क्यों बनाया गया?
सुनेत्रा पवार को इस पद के लिए चुनने के पीछे कई गहरे रणनीतिक और भावनात्मक कारण हैं:
- विरासत को संभालना: अजित पवार के निधन के बाद उनकी राजनीतिक विरासत और बारामती के गढ़ को सुरक्षित रखने के लिए परिवार के ही किसी सदस्य का आगे आना ज़रूरी था। सुनेत्रा पवार वर्षों से अजित दादा के साथ कंधे से कंधा मिलाकर काम कर रही थीं।
- पार्टी की एकजुटता: अजित पवार के समर्थक और पार्टी के विधायक किसी ऐसे चेहरे को चाहते थे जो सबको साथ लेकर चल सके। सुनेत्रा पवार की स्वीकार्यता पूरी पार्टी में है, जिससे फूट पड़ने का खतरा कम हो गया।
- प्रशासनिक अनुभव: भले ही वे पहले किसी संवैधानिक पद पर नहीं रहीं, लेकिन उन्होंने विद्या प्रतिष्ठान और अन्य संस्थाओं के माध्यम से दशकों तक प्रबंधन संभाला है। उन्हें मंत्रालय के कामकाज की अच्छी समझ है।
- सहानुभूति और महिला कार्ड: अजित दादा के निधन के बाद जनता में उनके प्रति काफी सहानुभूति है। ऐसे में एक महिला को (जो उनकी पत्नी भी हैं) पद सौंपकर सरकार ने आधी आबादी को एक सशक्त संदेश दिया है।
आज शाम क्या होगा खास?
राजभवन में आयोजित होने वाले समारोह में राज्यपाल उन्हें पद की शपथ दिलाएंगे। इस शपथ ग्रहण के साथ ही महाराष्ट्र की राजनीति में शक्ति का नया समीकरण दिखाई देगा। राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि सुनेत्रा पवार के आने से सरकार में महिला कल्याण से जुड़ी योजनाओं को और अधिक गति मिलेगी।
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