Mantra Shakti महालक्ष्मी के शक्तिशाली मंत्र ‘ॐ योगमाये महालक्ष्मी नारायणी नमोस्तुते’ का अर्थ, जाप की विधि और इसके अद्भुत लाभों के बारे में विस्तार से जानें। धन और सुख-शांति के लिए श्रेष्ठ मंत्र।
Mantra Shakti मंत्र का अर्थ और प्रभाव: आध्यात्मिक रहस्य
अंधकार से प्रकाश की ओर ले जाने वाली, दरिद्रता को मिटाकर समृद्धि देने वाली जगत जननी माँ महालक्ष्मी के इस शक्तिशाली मंत्र में छिपा है खुशियों का रहस्य। जब मन अशांत हो और रास्ते बंद नजर आएं, तो माँ की शरण में खुद को समर्पित कर दें। उनकी दिव्य शक्ति आपके जीवन के हर दुख को हर लेगी और सुख-शांति का मार्ग प्रशस्त करेगी। 🙏 धन, वैभव और मानसिक शांति के लिए आज ही इस मंत्र को अपने जीवन का हिस्सा बनाएं।

महालक्ष्मी कृपा का महामंत्र – अर्थ और महिमा
हिंदू धर्म शास्त्रों में देवी लक्ष्मी को धन, वैभव और ऐश्वर्य की देवी माना गया है। लेकिन जब हम “ॐ योगमाये महालक्ष्मी नारायणी नमोस्तुते” का जाप करते हैं, तो हम केवल धन ही नहीं, बल्कि उस परम चेतना को पुकारते हैं जो इस संसार का आधार है।
मंत्र की गहन व्याख्या
इस मंत्र में ‘योगमाया’ शब्द का प्रयोग विशेष है। योगमाया वह शक्ति है जिसने संसार को माया के आवरण में रखा है और जो भक्तों के मोह-बंधन काटती भी है। जब हम ‘नारायणी’ कहते हैं, तो हम स्वीकार करते हैं कि लक्ष्मी और नारायण एक ही हैं—जहाँ नारायण हैं, वहीं स्थायी लक्ष्मी का वास होता है।
Mantra Shakti साधना की विधि
इस मंत्र का पूर्ण लाभ उठाने के लिए शुक्रवार के दिन कमल गट्टे की माला या स्फटिक की माला से जाप करना अत्यंत शुभ माना जाता है। उत्तर या पूर्व दिशा की ओर मुख करके घी का दीपक जलाकर इसका कम से कम 108 बार जाप करें।
जीवन पर प्रभाव
शास्त्रों के अनुसार, जो व्यक्ति नियमित रूप से इस मंत्र का उच्चारण करता है, उसके घर में दरिद्रता का वास नहीं होता। यह मंत्र न केवल भौतिक सुख देता है, बल्कि व्यक्ति के भीतर ‘योग’ की शक्ति को भी जाग्रत करता है, जिससे वह कठिन परिस्थितियों में भी स्थिर रह पाता है। यदि आप करियर में बाधाओं का सामना कर रहे हैं, तो यह मंत्र आपके मार्ग की बाधाओं को दूर करने में सहायक सिद्ध हो सकता है।


मंत्र का सरल अर्थ
इस मंत्र में देवी के तीन प्रमुख रूपों और उनकी शक्तियों को नमन किया गया है:
- योगमाये: भगवान की वह दिव्य शक्ति जो पूरे ब्रह्मांड को संचालित करती है और भक्तों के लिए असंभव को संभव बनाती है।
- महालक्ष्मी: ऐश्वर्य, सौभाग्य और समृद्धि की अधिष्ठात्री देवी।
- नारायणी: भगवान नारायण (विष्णु) की शक्ति, जो सृष्टि का पालन करती हैं।
- नमोस्तुते: मैं आपको बारंबार प्रणाम करता/करती हूँ।
इसका बीज मंत्र क्या है?
इस मंत्र का मूल आधार “श्रीं” (Shreem) है, जो महालक्ष्मी का मुख्य बीज मंत्र माना जाता है। हालांकि यह मंत्र अपने आप में एक ‘प्रार्थना मंत्र’ है, लेकिन इसके जाप से वही ऊर्जा जाग्रत होती है जो बीज मंत्रों के संयोजन से प्राप्त होती है।
किसे करना चाहिए इसका जाप?
- जो आर्थिक तंगी या कर्ज से परेशान हैं।
- जो मानसिक शांति और पारिवारिक सुख-शांति की इच्छा रखते हैं।
- व्यापारी और छात्र, जिन्हें सफलता और एकाग्रता की आवश्यकता है।
- साधक जो आध्यात्मिक उन्नति और भगवती की कृपा पाना चाहते हैं।
जाप के प्रभाव
- सकारात्मक ऊर्जा: घर और मन से नकारात्मकता दूर होती है।
- समृद्धि: आय के नए स्रोत खुलते हैं और रुके हुए काम पूरे होते हैं।
- चित्त की शुद्धि: भय और तनाव से मुक्ति मिलती है।
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