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Maa Baglamukhi Jayanti 2026: कब है बगलामुखी जयंती? जानें शुभ मुहूर्त, शत्रु नाशक पूजा विधि, व्रत कथा और शक्तिशाली मंत्र

Maa Baglamukhi Jayanti 2026: कब है बगलामुखी जयंती? जानें शुभ मुहूर्त, शत्रु नाशक पूजा विधि, व्रत कथा और शक्तिशाली मंत्र

Maa Baglamukhi Jayanti 2026: माँ बगलामुखी जयंती 2026 की सही तिथि, पूजा का शुभ मुहूर्त और विधि यहाँ जानें। शत्रुओं पर विजय और वाक-सिद्धि के लिए कैसे करें पीताम्बरा देवी की साधना। दस महाविद्याओं में से एक, माँ बगलामुखी की जयंती शक्ति साधना के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण मानी जाती है, पढ़ें विस्तार से।

शत्रुओं पर विजय और जीवन की बाधाओं को दूर करने वाली माँ बगलामुखी की जयंती इस वर्ष विशेष संयोग लेकर आ रही है। जानें पूजा का शुभ समय और विधि। जय माँ पीताम्बरा!

Maa Baglamukhi Jayanti 2026: शत्रुओं का नाश और वाक-सिद्धि देने वाली माँ बगलामुखी की महिमा

Maa Baglamukhi Jayanti 2026
Maa Baglamukhi Jayanti 2026

हिंदू पंचांग के अनुसार, वैशाख मास के शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि को माँ बगलामुखी जयंती मनाई जाती है। माँ बगलामुखी दस महाविद्याओं में आठवीं महाविद्या हैं। इन्हें ‘पीताम्बरा’ भी कहा जाता है क्योंकि इन्हें पीला रंग अत्यंत प्रिय है। यह देवी शक्ति, विजय और शत्रुओं को जड़वत (स्तम्भित) करने की अधिष्ठात्री देवी मानी जाती हैं।

बगलामुखी जयंती 2026 की तिथि और शुभ मुहूर्त

वर्ष 2026 में माँ बगलामुखी जयंती की तिथि निम्नलिखित है:

  • जयंती तिथि: 24 अप्रैल 2026, शुक्रवार
  • अष्टमी तिथि प्रारंभ: 23 अप्रैल 2026 की देर रात से
  • अष्टमी तिथि समाप्त: 24 अप्रैल 2026 की शाम तक

(नोट: उदय तिथि के अनुसार 24 अप्रैल को ही व्रत और पूजन श्रेष्ठ रहेगा।)

Maa Baglamukhi Jayanti 2026
Maa Baglamukhi Jayanti 2026

माँ बगलामुखी की उत्पत्ति की कथा

पौराणिक कथाओं के अनुसार, सतयुग में एक बार भीषण तूफान उठा, जिससे संपूर्ण सृष्टि का विनाश होने लगा। इस आपदा से चिंतित होकर भगवान विष्णु ने सौराष्ट्र (गुजरात) के ‘हरिद्रा सरोवर’ के तट पर कठोर तपस्या की। उनकी तपस्या से प्रसन्न होकर महाशक्ति माँ बगलामुखी प्रकट हुईं।

माँ बगलामुखी ने अपनी दिव्य शक्ति से उस विनाशकारी तूफान को क्षण भर में रोक दिया और सृष्टि की रक्षा की। इसी कारण इन्हें ‘स्तम्भन’ की देवी कहा जाता है। वे शत्रुओं की बुद्धि, वाणी और गति को रोकने में सक्षम हैं।

Maa Baglamukhi Jayanti 2026
Maa Baglamukhi Jayanti 2026

पूजा विधि (Step-by-Step)

बगलामुखी पूजा में पीले रंग का विशेष महत्व है। इसे ‘पीताम्बरा विद्या’ भी कहा जाता है।

  1. शुद्धिकरण: जयंती के दिन प्रातः काल उठकर पीले वस्त्र धारण करें।
  2. संकल्प: हाथ में जल लेकर व्रत और शत्रुओं पर विजय या मनोकामना पूर्ति का संकल्प लें।
  3. वेदी स्थापना: एक चौकी पर पीला कपड़ा बिछाएं और माँ बगलामुखी की प्रतिमा या यंत्र स्थापित करें।
  4. पीला पूजन: देवी को पीले चावल, पीले फूल (जैसे गेंदा), पीला चंदन और हल्दी चढ़ाएं।
  5. नैवेद्य: माँ को पीले फल, बेसन के लड्डू या केसर युक्त खीर का भोग लगाएं।
  6. जाप: हल्दी की माला से माँ के मंत्रों का जाप करना सर्वश्रेष्ठ माना जाता है।
  7. आरती: अंत में कर्पूर जलाकर माँ की आरती करें और क्षमा प्रार्थना करें।

शक्तिशाली माँ बगलामुखी मंत्र

माँ बगलामुखी की साधना सावधानी और श्रद्धा के साथ करनी चाहिए। उनके सबसे प्रचलित मंत्र निम्नलिखित हैं:

1. एकाक्षरी मंत्र:

ह्रीं

2. मूल मंत्र (शत्रु नाशक):

ॐ ह्लीं बगलामुखि सर्वदुष्टानां वाचं मुखं पदं स्तम्भय जिह्वां कीलय बुद्धिं विनाशय ह्लीं ॐ स्वाहा।।

(अर्थ: हे माँ बगलामुखी! सभी दुष्टों की वाणी, मुख और पैरों को स्तम्भित कर दो, उनकी जिह्वा को कील दो और उनकी बुद्धि का नाश करो।)

Maa Baglamukhi Jayanti 2026
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माँ बगलामुखी पूजा के लाभ

  • शत्रु बाधा से मुक्ति: कोर्ट-कचहरी के मामलों और गुप्त शत्रुओं पर विजय प्राप्त करने के लिए यह पूजा अचूक है।
  • वाक-सिद्धि: जो लोग सार्वजनिक क्षेत्र, राजनीति या वकालत में हैं, उन्हें वाक-शक्ति प्राप्त होती है।
  • नकारात्मकता का नाश: घर से बुरी शक्तियों और नजर दोष को दूर करने के लिए माँ की कृपा फलदायी है।
  • प्रतियोगी परीक्षाओं में सफलता: एकाग्रता और बुद्धि के विकास के लिए विद्यार्थी माँ का आशीर्वाद लेते हैं।

साधना के दौरान सावधानियां

माँ बगलामुखी की साधना अत्यंत उग्र मानी जाती है। इसलिए:

  • साधना के दौरान पूर्ण ब्रह्मचर्य का पालन करें।
  • झूठ बोलने और किसी का बुरा चाहने से बचें।
  • यदि संभव हो तो किसी गुरु के मार्गदर्शन में ही बड़ी साधना या अनुष्ठान करें।
  • सात्विक भोजन का ही सेवन करें।

भारत में माँ बगलामुखी के तीन मुख्य ऐतिहासिक और सिद्ध शक्तिपीठ माने जाते हैं, जहाँ भारी संख्या में भक्त और साधक दर्शन के लिए पहुँचते हैं। इनके अलावा भी देश के विभिन्न हिस्सों में उनके महत्वपूर्ण मंदिर स्थित हैं:

भारत के 3 प्रमुख सिद्ध पीठ

  1. माँ बगलामुखी मंदिर, नलखेड़ा (मध्य प्रदेश):
    • स्थान: आगर मालवा जिला (उज्जैन से लगभग 100 किमी दूर)।
    • विशेषता: यह लखुंदर नदी के तट पर स्थित है। माना जाता है कि यहाँ की मूर्ति पांडवकालीन है और स्वयं श्री कृष्ण के कहने पर युधिष्ठिर ने यहाँ साधना की थी। यह तंत्र साधना के लिए सबसे प्रमुख केंद्र माना जाता है।
  2. श्री पीताम्बरा पीठ, दतिया (मध्य प्रदेश):
    • स्थान: ग्वालियर के पास, दतिया शहर में।
    • विशेषता: इस मंदिर की स्थापना 1935 में स्वामी जी (महाराज श्री) ने की थी। यह राजनीतिज्ञों और विशिष्ट हस्तियों के बीच बहुत प्रसिद्ध है। यहाँ माँ बगलामुखी के साथ धूमावती माता का भी मंदिर है।
  3. बनखंडी बगलामुखी मंदिर (हिमाचल प्रदेश):
    • स्थान: कांगड़ा जिले के बनखंडी में (होशियारपुर-पठानकोट-मंडी हाईवे पर)।
    • विशेषता: यह मंदिर धौलाधार की पहाड़ियों के बीच स्थित है। मान्यता है कि अज्ञातवास के दौरान पांडवों ने यहाँ माँ की आराधना की थी। यहाँ का प्राचीन हवन कुंड बहुत प्रसिद्ध है।

अन्य महत्वपूर्ण मंदिर

  • कामाख्या मंदिर, असम: गुवाहाटी के कामाख्या शक्तिपीठ परिसर में दसों महाविद्याओं के मंदिर हैं, जिनमें से एक माँ बगलामुखी को समर्पित है।
  • ऋषिकेश/हरिद्वार (उत्तराखंड): यहाँ भी माँ बगलामुखी के प्रसिद्ध सिद्ध स्थान और आश्रम हैं।
  • सूमलापुर, कर्नाटक: दक्षिण भारत के रायचूर जिले में माँ बगलामुखी का एक प्राचीन और शक्तिशाली मंदिर स्थित है।
  • पठानकोट (पंजाब): पठानकोट-मंडी राष्ट्रीय राजमार्ग पर कोटला में भी एक विशाल मंदिर स्थित है।
  • तमिलनाडु: तिरुनेलवेली जिले के पापनकुलम गाँव में भी माँ का एक शक्तिपीठ स्थित है।

इन मंदिरों में विशेष रूप से गुरुवार और शनिवार को दर्शन का बड़ा महत्व होता है। चुनाव, मुकदमेबाजी और शत्रुओं पर विजय की कामना के लिए इन स्थानों पर विशेष अनुष्ठान कराए जाते हैं।

माँ बगलामुखी जयंती केवल एक धार्मिक उत्सव नहीं, बल्कि स्वयं के भीतर के शत्रुओं—क्रोध, मोह और लोभ—को स्तम्भित करने का अवसर है। 24 अप्रैल 2026 को पूरी श्रद्धा के साथ माँ की आराधना करें और अपने जीवन को भयमुक्त और समृद्ध बनाएं।



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