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Santan Prapti Ke Upay: क्या आपकी गोद अब तक सूनी है?

Santan Prapti Ke Upay: क्या आपकी गोद अब तक सूनी है?

Santan Prapti Ke Upay: संतान सुख की चाह रखने वाले दंपतियों के लिए पुरुषोत्तम मास (अधिकमास) एक वरदान की तरह है। इस पवित्र महीने में भगवान श्रीकृष्ण (लड्डू गोपाल) की विशेष पूजा और कुछ खास फलों का भोग लगाने से घर में किलकारियां गूंज उठती हैं

Santan Prapti Ke Upay: क्या आप भी संतान सुख से वंचित हैं? इस पुरुषोत्तम मास में भगवान श्रीकृष्ण को अर्पित करें ये खास फल और करें विशेष उपाय। निःसंतान दंपतियों को मिलेगा लड्डू गोपाल का आशीर्वाद। निःसंतान दंपतियों के लिए बेहद खास है पुरुषोत्तम मास! इस महीने भगवान विष्णु और श्रीकृष्ण की आराधना से दूर हो सकते हैं कुंडली के संतान दोष। जानिए कौन सा फल चढ़ाने से प्रसन्न होते हैं कान्हा। 🦚✨

संतान प्राप्ति की इच्छा है? पुरुषोत्तम मास में श्रीकृष्ण को चढ़ाएं ये खास फल, निःसंतान दंपति की सूनी गोद भरेगा लड्डू गोपाल का आशीर्वाद! Santan Prapti Ke Upay

Santan Prapti Ke Upay

Santan Prapti Ke Upay: हिंदू धर्म में पुरुषोत्तम मास (जिसे अधिकमास या मलमास भी कहा जाता है) को बेहद पवित्र और चमत्कारी महीना माना गया है। यह महीना भगवान विष्णु और उनके पूर्ण अवतार भगवान श्रीकृष्ण को समर्पित है। शास्त्रों के अनुसार, इस महीने में किए गए दान, पुण्य, व्रत और पूजा का फल आम दिनों की तुलना में हजारों गुना अधिक मिलता है।

यदि विवाह के कई वर्षों बाद भी किसी दंपति को संतान सुख का आनंद नहीं मिला है, वे चिकित्सा और तमाम उपायों के बाद भी निराश हो चुके हैं, तो पुरुषोत्तम मास उनके लिए एक दिव्य अवसर लेकर आता है। मान्यता है कि इस विशेष महीने में श्रद्धापूर्वक भगवान श्रीकृष्ण (लड्डू गोपाल) की सेवा करने और उन्हें कुछ खास फल अर्पित करने से सूनी गोद जल्द ही हरी-भरी हो जाती है। आइए जानते हैं पुरुषोत्तम मास का महत्व, संतान प्राप्ति के लिए चढ़ाए जाने वाले खास फल और विशेष पूजा विधि।

क्यों इतना चमत्कारी है पुरुषोत्तम मास?

ज्योतिष और हिंदू पंचांग के अनुसार, सूर्य और चंद्र मास के बीच संतुलन बनाने के लिए हर तीन साल में एक बार ‘अधिकमास’ आता है। चूंकि इस महीने का कोई स्वामी ग्रह या देवता नहीं था, इसलिए स्वयं भगवान विष्णु ने इसे अपना नाम दिया—‘पुरुषोत्तम मास’

“जो व्यक्ति पुरुषोत्तम मास में मेरी शरण में आता है, उसके जीवन के सभी पाप, दोष और बाधाएं स्वतः ही नष्ट हो जाती हैं। विशेषकर संतानहीनता का दंश झेल रहे भक्तों पर मेरी विशेष कृपा होती है।” – पद्म पुराण

इस महीने में किए जाने वाले धार्मिक अनुष्ठान सीधे भगवान नारायण तक पहुंचते हैं। इसलिए, कुंडली में मौजूद ‘पितृ दोष’ या ‘संतान बाधक दोष’ को दूर करने के लिए इस महीने को सर्वोत्तम माना गया है।

संतान प्राप्ति के लिए श्रीकृष्ण को चढ़ाएं ये खास फल

पुरुषोत्तम मास में भगवान श्रीकृष्ण को मौसमी फलों का भोग लगाना बेहद शुभ माना जाता है, लेकिन संतान की इच्छा रखने वाले दंपतियों के लिए कुछ विशेष फलों का धार्मिक और प्रतीकात्मक महत्व है: Santan Prapti Ke Upay

1. संतरा और केला (वंश वृद्धि का प्रतीक)

केला भगवान विष्णु का अत्यंत प्रिय फल है और यह वंश वृद्धि का प्रतीक माना जाता है। पुरुषोत्तम मास के किसी भी शुभ दिन (विशेषकर एकादशी या गुरुवार) को निःसंतान दंपति को भगवान श्रीकृष्ण के बाल रूप (लड्डू गोपाल) को पीले पके हुए केलों का भोग लगाना चाहिए। बाद में इन केलों को छोटे बच्चों में बांट देना चाहिए।

2. नारियल (श्रीफल)

नारियल को शास्त्रों में ‘श्रीफल’ यानी लक्ष्मी और समृद्धि का फल कहा गया है। पुरुषोत्तम मास में एक पानी वाला जटा जूट युक्त नारियल लें, उस पर कलावा (मौली) बांधें और सिंदूर से तिलक करके कान्हा के चरणों में अर्पित करें। पूजा संपन्न होने के बाद इस नारियल के प्रसाद को पति-पत्नी दोनों मिलकर ग्रहण करें।

3. माखन-मिश्री के साथ मौसमी फल

यद्यपि माखन-मिश्री फल नहीं है, लेकिन इसके बिना कान्हा की कोई भी पूजा अधूरी है। मौसमी फल जैसे सेब या अनार के साथ माखन-मिश्री का भोग लगाने से भगवान का बाल रूप अत्यंत प्रसन्न होता है और साधक को संतान के रूप में अपने जैसा ही सुंदर और योग्य बालक होने का वरदान देता है।

निःसंतान दंपति के लिए पुरुषोत्तम मास की विशेष पूजा विधि

यदि आप इस महीने संतान प्राप्ति का संकल्प ले रहे हैं, तो पति-पत्नी दोनों को मिलकर पूरे महीने या कम से कम इस महीने की दोनों एकादशियों पर यह विधि अपनानी चाहिए: Santan Prapti Ke Upay

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  • ब्रह्म मुहूर्त में स्नान: सुबह सूर्योदय से पूर्व उठकर स्नान आदि से निवृत्त होकर पीले रंग के वस्त्र धारण करें।
  • लड्डू गोपाल का अभिषेक: अपने घर के मंदिर में लड्डू गोपाल की मूर्ति को तांबे या चांदी के पात्र में रखें। उन्हें कच्चे दूध, गंगाजल, दही, घी और शहद (पंचामृत) से स्नान कराएं।
  • पीले फूलों से श्रृंगार: कान्हा को पीले चंदन का तिलक लगाएं, पीले वस्त्र पहनाएं और पीले गेंदे के फूल या वैजंती के फूल अर्पित करें।
  • फल और दीप दान: ऊपर बताए गए फलों का भोग लगाएं और शुद्ध गाय के घी का दीपक प्रज्वलित करें। पुरुषोत्तम मास में दीपदान का विशेष महत्व है।
  • संतान गोपाल मंत्र का जाप: तुलसी की माला से कम से कम 108 बार नीचे दिए गए चमत्कारी मंत्र का जाप करें।

सबसे प्रभावशाली महामंत्र: संतान गोपाल मंत्र

संतान प्राप्ति के लिए शास्त्रों में ‘संतान गोपाल मंत्र’ को अचूक माना गया है। पुरुषोत्तम मास में इस मंत्र का प्रभाव सौ गुना बढ़ जाता है। पति-पत्नी दोनों या कोई एक पूरी श्रद्धा के साथ इस मंत्र का पाठ करें: Santan Prapti Ke Upay

“देवकी सुत गोविंद वासुदेव जगत्पते।”

“देहि मे तनयं कृष्ण त्वामहं शरणं गतः।”

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मंत्र का अर्थ: हे देवकी के पुत्र, हे गोविंद, हे वासुदेव, हे जगत के स्वामी! मुझे पुत्र (संतान) प्रदान कीजिए, मैं आपकी शरण में आया हूँ/आई हूँ।

इन बातों का रखें विशेष ध्यान (नियम और परहेज) Santan Prapti Ke Upay

पुरुषोत्तम मास में यदि आप संतान की कामना से व्रत या विशेष पूजा कर रहे हैं, तो कुछ कड़े नियमों का पालन करना अनिवार्य है: Santan Prapti Ke Upay

  1. ब्रह्मचर्य का पालन: पूरे महीने या पूजा के दिनों में मन, वचन और कर्म से ब्रह्मचर्य का पालन करें।
  2. सात्विक भोजन: घर में लहसुन, प्याज, मांस या मदिरा का प्रवेश पूरी तरह वर्जित होना चाहिए। केवल सात्विक भोजन ही ग्रहण करें।
  3. कटु वचनों से बचें: किसी की निंदा न करें, न ही किसी असहाय या बच्चे का दिल दुखाएं। बच्चों को कन्हैया का रूप मानकर उन्हें प्यार और उपहार दें।
  4. गौ सेवा: इस महीने में गाय (विशेषकर बछड़े वाली गाय) को हरा चारा खिलाना और उनकी सेवा करना संतान प्राप्ति के मार्ग की सभी अड़चनों को दूर करता है।

निष्कर्ष

धर्म और आस्था अपनी जगह हैं, लेकिन चिकित्सा विज्ञान का अपना महत्व है। निःसंतान दंपतियों को डॉक्टरी परामर्श के साथ-साथ इस पवित्र पुरुषोत्तम मास में आध्यात्मिक ऊर्जा का सहारा भी अवश्य लेना चाहिए। जब दवा और दुआ दोनों एक साथ काम करती हैं, तो चमत्कार अवश्य होता है। इस पुरुषोत्तम मास में पूर्ण विश्वास और साफ मन से भगवान श्रीकृष्ण की भक्ति करें, जगत के पालनहार आपकी सूनी गोद को अवश्य भरेंगे।


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