Somvati Amavasya 2026: ज्येष्ठ सोमवती अमावस्या पर बन रहा है दुर्लभ संयोग, जानें इस दिन क्या करें और क्या करने से बचें!
Somvati Amavasya 2026 Do’s and Don’ts: जून में आने वाली ज्येष्ठ सोमवती अमावस्या धार्मिक दृष्टि से बेहद खास है। सौभाग्य वृद्धि और पितृ दोष से मुक्ति के लिए इस दिन क्या करना चाहिए और किन गलतियों से बचना चाहिए, जानिए विस्तार से।
🌙 ज्येष्ठ सोमवती अमावस्या 2026 🌙 साल की सबसे पुण्यदायी अमावस्याओं में से एक 'सोमवती अमावस्या' इस बार ज्येष्ठ महीने में आ रही है! यह दिन सुहागिन महिलाओं के लिए अखंड सौभाग्य का वरदान लाता है, तो वहीं पितरों की तृप्ति के लिए भी इसे सर्वोत्तम माना गया है। इस विशेष दिन पर आपकी एक छोटी सी गलती आपको भारी पड़ सकती है। जानिए इस दिन क्या करना शुभ होता है और क्या करने की सख्त मनाही है।
Somvati Amavasya 2026 (ज्येष्ठ सोमवती अमावस्या 2026): क्यों है यह इतनी खास? जानिए इस दिन के नियम, उपाय और ‘क्या करें, क्या न करें’
सनातन धर्म में अमावस्या तिथि का अपना एक विशेष आध्यात्मिक और ज्योतिषीय महत्व है, लेकिन जब यह तिथि सोमवार के दिन पड़ती है, तो इसका महत्व सौ गुना अधिक बढ़ जाता है। हिंदू पंचांग के अनुसार, इस बार ज्येष्ठ मास के कृष्ण पक्ष की अमावस्या सोमवार (15 जून 2026) के दिन आ रही है, जिसे ‘ज्येष्ठ सोमवती अमावस्या’ कहा जाएगा।

सोमवार का दिन भगवान शिव और चंद्रमा को समर्पित होता है, जबकि अमावस्या तिथि के स्वामी पितृ देव (पूर्वज) माने जाते हैं। इसलिए, सोमवती अमावस्या के दिन महादेव, माता पार्वती, चंद्रमा और पितरों की कृपा एक साथ प्राप्त की जा सकती है। यह दिन विवाहित महिलाओं के लिए अखंड सौभाग्य का पर्व है, तो वहीं कुंडली में पितृ दोष, कालसर्प दोष या शनि दोष से पीड़ित जातकों के लिए एक अचूक अवसर।
आइए विस्तार से जानते हैं कि इस बार ज्येष्ठ सोमवती अमावस्या पर क्या खास है, इस दिन क्या करना चाहिए और किन बातों से सख्त परहेज करना चाहिए।

इस बार की सोमवती अमावस्या पर क्या है खास?
महाभारत काल में भी सोमवती अमावस्या का विशेष उल्लेख मिलता है। भीष्म पितामह ने युधिष्ठिर को इस दिन का महत्व बताते हुए कहा था कि जो मनुष्य इस दिन पवित्र नदियों में स्नान और दान करता है, उसे अक्षय पुण्य की प्राप्ति होती है और उसके पितर कई वर्षों तक तृप्त रहते हैं।
इस बार ज्येष्ठ महीने में सोमवती अमावस्या का आना और भी खास है क्योंकि ज्येष्ठ मास में सूर्य देव अपनी पूरी तपिश पर होते हैं। इस तपन के महीने में जल, अन्न और छायादार चीजों का दान करने से व्यक्ति के जीवन के सभी संताप मिट जाते हैं। साथ ही, सोमवार का संयोग होने से जिन लोगों का मानसिक तनाव अधिक रहता है या जिनका चंद्रमा कमजोर है, उन्हें मानसिक शांति मिलती है।

सोमवती अमावस्या पर ‘क्या करें’? (Do’s on Somvati Amavasya)
शास्त्रों के अनुसार, इस पवित्र दिन पर कुछ विशेष कार्यों को करने से घर में सुख-समृद्धि आती है और भाग्य का उदय होता है: Somvati Amavasya 2026
1. पवित्र नदी में स्नान और सूर्य अर्घ्य
अमावस्या के दिन सूर्योदय से पहले उठकर किसी पवित्र नदी (जैसे गंगा, यमुना, नर्मदा) में स्नान करना सर्वोत्तम माना जाता है। यदि नदी पर जाना संभव न हो, तो घर पर ही नहाने के पानी में थोड़ा सा गंगाजल मिलाकर स्नान करें। स्नान के बाद तांबे के लोटे में जल, लाल चंदन और काले तिल डालकर सूर्य देव को अर्घ्य दें।
2. पीपल वृक्ष की पूजा और परिक्रमा
Somvati Amavasya 2026 सोमवती अमावस्या के दिन पीपल के पेड़ की पूजा का सबसे अधिक महत्व है। शास्त्रों के अनुसार, पीपल के वृक्ष के मूल में भगवान विष्णु, तने में शिव और अग्रभाग में ब्रह्मा जी का वास होता है।
- इस दिन पीपल के पेड़ की जड़ में कच्चा दूध और जल अर्पित करें।
- पीपल के वृक्ष पर सफेद या पीला सूती धागा (कलावा) लपेटते हुए 108 बार परिक्रमा करें।
- परिक्रमा के दौरान माताएं ‘ॐ नमो भगवते वासुदेवाय’ या ‘ॐ नमः शिवाय’ का जाप करती हुई फल, मिठाई या सूखे मेवे अर्पित करती हैं।
3. पितरों के नाम तर्पण और श्राद्ध
यह दिन पूर्वजों को प्रसन्न करने के लिए सबसे उत्तम है। दोपहर के समय दक्षिण दिशा की ओर मुख करके पितरों के निमित्त काले तिल के साथ जल का तर्पण करें। उनके नाम से सात्विक भोजन बनाएं और उसका एक हिस्सा गाय, कौए और कुत्ते को जरूर खिलाएं।
4. ‘ठंडी’ चीजों का विशेष दान
चूंकि यह ज्येष्ठ का महीना है, इसलिए इस दिन ब्राह्मणों या जरूरतमंदों को जल से भरा मिट्टी का घड़ा (मटका), खरबूजा, तरबूज, पंखा (हाथ का या बिजली का), सत्तू, छाता और चप्पल दान करने से कई यज्ञों के समान पुण्य मिलता है।
सोमवती अमावस्या पर ‘क्या न करें’? (Don’ts on Somvati Amavasya)
अमावस्या तिथि को नकारात्मक शक्तियों और मानसिक संवेदनशीलता का समय भी माना जाता है। इसलिए इस दिन कुछ गलतियों को करने से बचना चाहिए, अन्यथा पितृ नाराज हो सकते हैं और घर में दरिद्रता आ सकती है: Somvati Amavasya 2026

1. तामसिक भोजन और नशीले पदार्थों से दूरी
इस दिन भूलकर भी घर में मांस, मदिरा, लहसुन, प्याज या किसी भी प्रकार के तामसिक भोजन का प्रयोग न करें। यहाँ तक कि इस दिन मसूर की दाल, बैंगन और मूली खाने की भी शास्त्रों में मनाही है।
2. वाद-विवाद और अपशब्दों से बचें
सोमवती अमावस्या के दिन घर का माहौल पूरी तरह शांत और भक्तिमय होना चाहिए। इस दिन किसी से झगड़ा न करें, झूठ न बोलें और किसी का अपमान न करें। विशेषकर घर के बुजुर्गों, महिलाओं और माता-पिता का दिल दुखाने से पितृ देव अत्यंत रुष्ट हो जाते हैं।
3. देर तक सोने से बचें Somvati Amavasya 2026
अमावस्या की सुबह को आलस में नहीं बिताना चाहिए। इस दिन सूर्योदय के बाद बहुत देर तक सोने से कुंडली में सूर्य और चंद्रमा दोनों कमजोर होते हैं, जिससे स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं और मानसिक तनाव बढ़ता है।
4. श्मशान या सूनी जगहों पर न जाएं
अमावस्या की रात को सबसे घनी और अंधेरी रात माना जाता है। इस दिन ब्रह्मांड में नकारात्मक ऊर्जाएं अधिक सक्रिय होती हैं। इसलिए, रात के समय किसी सुनसान रास्ते, श्मशान घाट या खंडहरों के पास जाने से बचना चाहिए।
5. ब्रह्मचर्य का पालन Somvati Amavasya 2026
अमावस्या तिथि के दिन स्त्री और पुरुष को पूर्ण रूप से ब्रह्मचर्य का पालन करना चाहिए। गरुड़ पुराण के अनुसार, अमावस्या के दिन कामुक विचारों से दूर रहकर केवल ईश्वर भक्ति में मन लगाना चाहिए।
सुख-समृद्धि के लिए सोमवती अमावस्या के अचूक उपाय
यदि आपके कार्यों में बार-बार बाधा आ रही है या परिवार में कोई न कोई बीमार रहता है, तो इस सोमवती अमावस्या पर ये उपाय जरूर करें:
- शिवलिंग का अभिषेक: दूध में काले तिल मिलाकर भगवान शिव का अभिषेक करें। इससे शनि की साढ़ेसाती और ढैय्या का प्रभाव कम होता है।
- तुलसी पूजा: इस दिन शाम के समय तुलसी के पौधे के पास घी का दीपक जलाएं और ॐ नमो भगवते वासुदेवाय मंत्र का जाप करते हुए परिक्रमा करें। इससे घर की आर्थिक तंगी दूर होती है।
- मछलियों और चींटियों को भोजन: किसी तालाब में जाकर मछलियों को आटे की गोलियां खिलाएं या सूखी मिट्टी में चींटियों को शक्कर मिला हुआ आटा डालें। ऐसा करने से कर्ज से मुक्ति मिलती है।
निष्कर्ष: Somvati Amavasya 2026
ज्येष्ठ सोमवती अमावस्या केवल एक व्रत नहीं, बल्कि अपनी अंतरात्मा को शुद्ध करने, पितरों के प्रति सम्मान व्यक्त करने और प्रकृति (जैसे पीपल और तुलसी) के प्रति आभार जताने का एक पावन पर्व है। नियमों का पालन करते हुए श्रद्धाभाव से की गई पूजा आपके जीवन को खुशियों से भर देगी।
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