Char Dham Yatra 2026: बदरीनाथ धाम के कपाट खुलते ही शुरू हुई चारधाम यात्रा; जानें चारों धामों का पौराणिक महत्व और दर्शन की महिमा
Char Dham Yatra 2026: की भव्य शुरुआत! 24 अप्रैल को वैदिक मंत्रोच्चार के साथ खुले बदरीनाथ धाम के कपाट। जानें केदारनाथ, बदरीनाथ, गंगोत्री और यमुनोत्री का महत्व और इस साल की यात्रा से जुड़ी मुख्य बातें।
इंतजार खत्म हुआ! बदरीनाथ धाम के कपाट खुलने के साथ ही उत्तराखंड की पावन चारधाम यात्रा शुरू हो गई है। क्या आप इस साल दर्शन के लिए जा रहे हैं?
आस्था का महाकुंभ


हिमालय की गोद में बसे उत्तराखंड के पावन चार धामों के द्वार अब श्रद्धालुओं के लिए खुल चुके हैं। आज, 24 अप्रैल 2026 को तड़के शुभ मुहूर्त में भगवान विष्णु के निवास स्थान ‘बदरीनाथ धाम’ के कपाट वैदिक मंत्रोच्चार और पारंपरिक अनुष्ठानों के साथ खोल दिए गए। इसके साथ ही साल 2026 की चारधाम यात्रा का विधिवत शुभारंभ हो गया है। कपाट खुलने के ऐतिहासिक क्षण का गवाह बनने के लिए हजारों की संख्या में श्रद्धालु बदरीनाथ पहुंचे, जहाँ पूरी घाटी ‘जय बदरी विशाल’ के जयघोष से गूंज उठी।
बदरीनाथ धाम के कपाट: भक्ति और उल्लास का नजारा
शुक्रवार सुबह सेना के बैंड की मधुर धुनों और हजारों भक्तों की मौजूदगी में बदरीनाथ मंदिर के मुख्य द्वार खोले गए। मुख्य पुजारी (रावल) ने गर्भ गृह में प्रवेश कर भगवान बदरी विशाल की विशेष पूजा-अर्चना की। मंदिर को कई क्विंटल फूलों से सजाया गया था, जो बर्फ से ढकी पहाड़ियों के बीच एक दिव्य आभा बिखेर रहा था। शासन-प्रशासन की ओर से पुख्ता इंतजाम किए गए थे ताकि पहले दिन दर्शन करने वाले भक्तों को किसी असुविधा का सामना न करना पड़े।


चारधाम यात्रा का महत्व: क्यों खास है यह यात्रा?
हिंदू धर्म में चारधाम यात्रा का विशेष आध्यात्मिक महत्व है। माना जाता है कि जीवन में कम से कम एक बार इन चारों धामों के दर्शन करने से मनुष्य को जन्म-मरण के चक्र से मुक्ति मिल जाती है और मोक्ष की प्राप्ति होती है। यह यात्रा केवल धार्मिक ही नहीं, बल्कि प्रकृति और संस्कृति के संगम का भी अनुभव कराती है।
आइए जानते हैं चारों धामों का अलग-अलग महत्व:
1. बदरीनाथ धाम (Badrinath Dham)
अलकनंदा नदी के तट पर स्थित यह धाम भगवान विष्णु को समर्पित है। इसे ‘धरती का वैकुंठ’ भी कहा जाता है। पौराणिक कथाओं के अनुसार, भगवान विष्णु ने यहाँ लंबे समय तक तपस्या की थी, तब माता लक्ष्मी ने उन्हें धूप और वर्षा से बचाने के लिए ‘बदरी’ (बेर) के पेड़ का रूप धारण किया था। इसी कारण इस स्थान का नाम बदरीनाथ पड़ा। यहाँ स्थित तप्त कुंड में स्नान का भी विशेष महत्व है।
2. केदारनाथ धाम (Kedarnath Dham)
बारह ज्योतिर्लिंगों में से एक, केदारनाथ धाम भगवान शिव का निवास स्थान है। यह मंदाकिनी नदी के तट पर स्थित है। महाभारत काल में पांडवों ने भगवान शिव को प्रसन्न करने के लिए यहाँ तपस्या की थी। केदारनाथ के दर्शन मात्र से ही भक्तों के सभी पाप धुल जाते हैं। दुर्गम पहाड़ियों के बीच स्थित यह मंदिर अपनी वास्तुकला और असीम शांति के लिए जाना जाता है।
3. गंगोत्री धाम (Gangotri Dham)
गंगोत्री वह पावन स्थान है जहाँ से मां गंगा का पृथ्वी पर अवतरण हुआ था। राजा भगीरथ की घोर तपस्या के बाद गंगा जी ने शिव की जटाओं से होकर धरती पर कदम रखा। यहाँ का मुख्य मंदिर देवी गंगा को समर्पित है। यहाँ से कुछ दूरी पर स्थित ‘गौमुख’ गंगा का उद्गम स्थल है, जहाँ जाना हर हिंदू का सपना होता है।
4. यमुनोत्री धाम (Yamunotri Dham)
चारधाम यात्रा की शुरुआत आमतौर पर यमुनोत्री से होती है। यह यमुना नदी का उद्गम स्थल है। देवी यमुना को सूर्य की पुत्री और यमराज की बहन माना जाता है। मान्यता है कि यमुनोत्री में पवित्र स्नान करने से अकाल मृत्यु का भय समाप्त हो जाता है। यहाँ ‘सूर्य कुंड’ के गर्म पानी में प्रसाद के रूप में चावल पकाए जाते हैं।
श्रद्धालुओं के लिए विशेष दिशा-निर्देश
चारधाम यात्रा 2026 के लिए उत्तराखंड सरकार ने व्यापक सुरक्षा और स्वास्थ्य इंतजाम किए हैं। चूंकि यह धाम अत्यधिक ऊंचाई पर स्थित हैं, इसलिए यात्रियों को सलाह दी गई है कि वे अपनी सेहत का विशेष ध्यान रखें। इस साल रजिस्ट्रेशन की प्रक्रिया को और भी सरल बनाया गया है, जिससे श्रद्धालु आसानी से टोकन प्राप्त कर दर्शन कर सकें।
जय बदरी विशाल! जय केदार!
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