पेरिमेनोपॉज़ क्या है (Perimenopause)? जानें इसके लक्षण, उम्र और राहत पाने के प्रभावी उपाय
Perimenopause चिड़चिड़ापन और अनियमित पीरियड्स? 40 की उम्र के बाद शरीर में होने वाले बदलाव
"क्या आपके पीरियड्स अनियमित हो गए हैं? जानें पेरिमेनोपॉज़ क्या है, यह किस उम्र में शुरू होता है और इसके लक्षणों को कम करने के लिए सही डाइट और लाइफस्टाइल टिप्स क्या हैं। महिलाओं के स्वास्थ्य पर एक विस्तृत रिपोर्ट।"
महिला का शरीर जीवन के विभिन्न चरणों में कई हार्मोनल बदलावों से गुजरता है। प्यूबर्टी (किशोरावस्था) से शुरू होकर मेनोपॉज़ (रजोनिवृत्ति) तक, यह यात्रा निरंतर चलती रहती है। इसी यात्रा का एक महत्वपूर्ण लेकिन अक्सर अनदेखा किया जाने वाला पड़ाव है ‘पेरिमेनोपॉज़’ (Perimenopause)। सरल शब्दों में कहें तो यह मेनोपॉज़ से ठीक पहले की स्थिति है, जहाँ शरीर प्रजनन के अंत की ओर कदम बढ़ाता है।

पेरिमेनोपॉज़ क्या है?
पेरिमेनोपॉज़ का अर्थ है “मेनोपॉज़ के आसपास का समय”। यह वह संक्रमण काल (Transition period) है जब अंडाशय (ovaries) धीरे-धीरे एस्ट्रोजन (Estrogen) हार्मोन बनाना कम कर देते हैं। इस दौरान हार्मोन का स्तर अचानक घटता और बढ़ता है, जिससे शरीर में कई शारीरिक और मानसिक बदलाव महसूस होते हैं।
Perimenopause (पेरिमेनोपॉज) वह समय है जब आपका शरीर मेनोपॉज (रजोनिवृत्ति) की ओर बढ़ने लगता है। इसे ‘मेनोपॉज़ल ट्रांज़िशन’ भी कहा जाता है। इस दौरान शरीर में Estrogen हार्मोन का स्तर ऊपर-नीचे होने लगता है, जिससे पीरियड्स और सेहत में बदलाव महसूस होते हैं।
यहाँ इसके बारे में पूरी जानकारी दी गई है:

1. यह कब शुरू होता है?
- उम्र: आमतौर पर यह 40 से 45 वर्ष की उम्र के बीच शुरू होता है। हालांकि, कुछ महिलाओं में यह 30 के दशक के आखिरी सालों में भी शुरू हो सकता है।
- अवधि: यह कुछ महीनों से लेकर 4-10 साल तक चल सकता है। जब आपको लगातार 12 महीनों तक पीरियड्स नहीं आते, तब पेरिमेनोपॉज खत्म होता है और मेनोपॉज शुरू हो जाता है।
2. इसके लक्षण क्या हैं?
हर महिला का अनुभव अलग हो सकता है, लेकिन सामान्य लक्षण ये हैं:
- अनियमित पीरियड्स: पीरियड्स का जल्दी आना, देरी से आना या फ्लो (flow) का कम-ज्यादा होना।
- Hot Flashes: अचानक गर्मी लगना और पसीना आना।
- नींद की समस्या: रात में ठीक से नींद न आना।
- मूड स्विंग्स: चिड़चिड़ापन, घबराहट या उदासी महसूस होना।
- हड्डियों की कमजोरी: कैल्शियम कम होने की वजह से जोड़ों में दर्द।
3. इस दौरान क्या करना चाहिए? (Self-Care Tips)
इस समय को आसानी से बिताने के लिए आप अपनी जीवनशैली में ये बदलाव कर सकती हैं:
आहार (Diet): Perimenopause
- कैल्शियम और विटामिन D: हड्डियों को मजबूत रखने के लिए दूध, दही, पनीर और हरी पत्तेदार सब्जियां लें।
- प्रोटीन: दालें, अंडे या सोयाबीन शामिल करें।
- पानी: शरीर को हाइड्रेटेड रखें।
व्यायाम (Exercise):
- Weight-bearing exercises: पैदल चलना या हल्का वजन उठाना हड्डियों के लिए अच्छा है।
- योग और प्राणायाम: तनाव और मूड स्विंग्स को कंट्रोल करने के लिए ‘अनुलोम-विलोम’ और ध्यान (Meditation) बहुत फायदेमंद है।
बुरी आदतों से बचें:
- ज्यादा कैफीन (चाय-कॉफी), तीखा खाना और शराब से बचें, क्योंकि ये ‘Hot Flashes’ को बढ़ा सकते हैं।

डॉक्टर की सलाह कब लें?
- अगर ब्लीडिंग बहुत ज्यादा हो रही हो।
- अगर पीरियड्स हर 21 दिन से पहले आ रहे हों।
- अगर आपके दैनिक जीवन पर इन लक्षणों का बहुत बुरा असर पड़ रहा हो।
एक जरूरी बात: पेरिमेनोपॉज के दौरान भी प्रेग्नेंसी की संभावना बनी रहती है, इसलिए अगर आप गर्भधारण नहीं चाहती हैं, तो गर्भनिरोधक (contraception) का उपयोग जारी रखना जरूरी है जब तक कि पूरे 12 महीने पीरियड्स बंद न हो जाएं।
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Cervical Mucus Awareness : शरीर के संकेतों को समझना सीखें
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