अहमदाबाद प्लेन क्रैश की पहली बरसी (Air India AI 171 crash anniversary): आग की लपटों का वो खौफनाक मंजर, जानें उस एकमात्र जीवित बचे शख्स और अपनों को खोने वालों का हाल
Air India AI 171 crash anniversary: AI-171 क्रैश के एक साल: जब अहमदाबाद के आसमान से बरसी थी मौत, 260 लोगों की याद और जिंदा बचे 'मिरेकल मैन' की दर्दभरी दास्तान। 12 जून 2025 को अहमदाबाद में हुए देश के सबसे भीषण एअर इंडिया विमान हादसे (AI-171) को एक साल पूरा हो गया है। जानिए आग की लपटों में खाक हुए मासूमों की दर्दनाक यादें, ग्राउंड पीड़ितों की कहानी और विमान में चमत्कारी रूप से जिंदा बचे इकलौते शख्स का आज क्या हाल है।
Air India AI 171 crash anniversary: अहमदाबाद प्लेन क्रैश की पहली बरसी: आग की लपटों में खाक हो गईं 260 जिंदगी, जानें उस ‘इकलौते’ जिंदा बचे शख्स और पीड़ितों का हाल
12 जून 2025, दोपहर के 1 बजकर 39 मिनट—अहमदाबाद का सरदार वल्लभभाई पटेल इंटरनेशनल एयरपोर्ट। एअर इंडिया के बोइंग 787 ड्रीमलाइनर (AI-171) ने लंदन के लिए उड़ान भरी ही थी कि महज 32 सेकंड के भीतर आसमान में कुछ ऐसा हुआ जिसने इतिहास का सबसे खौफनाक मंजर लिख दिया। विमान का इंजन बंद हुआ और वह सीधे एयरपोर्ट से महज 1.7 किलोमीटर दूर बीजे मेडिकल कॉलेज के रेजिडेंट डॉक्टर्स और स्टूडेंट हॉस्टल की इमारतों पर जा गिरा।


विमान के टूटते ही हजारों लीटर विमान ईंधन (Aviation Fuel) ने करीब 1500°C की ऐसी भीषण आग पकड़ी, जिसने न सिर्फ विमान के यात्रियों को, बल्कि जमीन पर मौजूद मासूमों को भी जिंदा भस्म कर दिया। इस हादसे में कुल 260 लोगों की मौत हुई थी (241 विमान के भीतर और 19 जमीन पर)।
आज इस खौफनाक त्रासदी को पूरा एक साल हो गया है। वक्त भले ही बीत गया हो, लेकिन अपनों को खोने वालों के जख्म आज भी उतने ही हरे हैं। आइए जानते हैं कि आज उन पीड़ितों के परिवारों और उस हादसे में साक्षात मौत के मुंह से बचकर निकले ‘चमत्कारी’ शख्स का क्या हाल है।
गुजरात के पूर्व CM विजय रूपाणी के इस फ्लाइट में ही थे।

हॉस्टल की रसोइया और ग्राउंड पीड़ितों की दर्दनाक दास्तान
Air India AI 171 crash anniversary: इस हादसे की सबसे क्रूर बात यह थी कि कई लोग ऐसे थे जो विमान में सवार ही नहीं थे, लेकिन फिर भी मौत का शिकार बन गए। विमान का दाहिना डैना हॉस्टल के डाइनिंग हॉल को चीरता हुआ निकला था, जहां छात्र लंच कर रहे थे।

- आग की लपटों के बीच मंजुलाबेन: हॉस्टल के किचन में काम करने वाली मंजुलाबेन रमेशभाई याद करती हैं, “खिड़की के बाहर सिर्फ आग ही आग थी। ऐसा लगा जैसे आसमान से कोई जलता हुआ पहाड़ गिर गया हो। मैं बस अपनी जान बचाकर भागी, लेकिन वो चीखें आज भी मेरे कानों में गूंजती हैं।”
- सड़क पर चलते हुए शिकार हुए महेश: 34 वर्षीय गुजराती फिल्ममेकर महेश जीरावाला उस दिन अपनी स्कूटी से मीटिंग कर लौट रहे थे। वे विमान में नहीं थे, लेकिन जब प्लेन क्रैश हुआ तो वे उसी इलाके से गुजर रहे थे। उनका शरीर इतनी बुरी तरह जल गया था कि उनके परिवार को 9 दिनों तक पता ही नहीं चला कि महेश अब इस दुनिया में नहीं हैं।
- मां के ठीक होने से पहले बेटा पंचतत्व में विलीन: मैदान पर मौजूद 19 मृतकों में युवा आकाश पटनी भी शामिल थे। उनकी मां सीताबेन पटनी गंभीर रूप से झुलस गईं और तीन हफ्ते ICU में रहीं। जब तक मां को होश आया और डॉक्टरों ने उन्हें खतरे से बाहर घोषित किया, तब तक उनके बेटे का अंतिम संस्कार हुए कई दिन बीत चुके थे।
टूटे हुए परिवार: हादसे के एक साल बाद भी, कई माता-पिता और चश्मदीद सदमे (PTSD) में हैं। पीड़ित परिवारों का कहना है, “हम जीना भूल चुके हैं, बस सांसें चल रही हैं।” कइयों को आज भी फ्लाइट में बैठने से डर लगता है।
सीट नंबर 11A: साक्षात मौत के मुंह से लौटे उस ‘इकलौते’ सर्वाइवर का क्या हाल है?
विमान में सवार 242 लोगों में से 241 की मौत हो गई थी। सभी 12 क्रू मेंबर्स मारे गए थे। लेकिन कंक्रीट और लोहे के उस जलते हुए मलबे के बीच से एक चमत्कार निकला था—सीट नंबर 11A पर बैठा एक यात्री!

विमान का अगला हिस्सा (Forward Section) जहां आपातकालीन निकास द्वार था, क्रैश के समय हॉस्टल की छत से टकराकर कुछ इस तरह अलग हुआ कि आग की मुख्य लपटें उस सीट तक तुरंत नहीं पहुंच पाईं।
कैसा है उस इकलौते सर्वाइवर का हाल?
Air India AI 171 crash anniversary: हादसे के एक साल बाद, वह शख्स शारीरिक रूप से तो धीरे-धीरे ठीक हो रहा है, लेकिन मानसिक रूप से वह आज भी उसी 12 जून के मलबे में फंसा हुआ है।
- गिल्ट और ट्रॉमा (Survivor’s Guilt): डॉक्टरों के मुताबिक, वह शख्स ‘सर्वाइवर्स गिल्ट’ से जूझ रहा है। उसके दिमाग में बार-बार यही सवाल आता है कि—“जब मेरे बगल में बैठे बच्चे, बुजुर्ग और पूरा क्रू मारा गया, तो भगवान ने सिर्फ मुझे ही क्यों बचाया?”
- शारीरिक रिकवरी: भीषण रूप से झुलसने और कई हड्डियां टूटने के कारण पिछले एक साल में उनकी कई सर्जरी हुई हैं। वह आज व्हीलचेयर और लाठी के सहारे चलने की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन उनकी जिंदगी अब पहले जैसी कभी नहीं हो पाएगी। वह मीडिया और बाहरी दुनिया से पूरी तरह दूर, एकांत में अपनी यादों से लड़ रहे हैं।

एक साल बाद भी अधूरा सवाल: हादसा आखिर हुआ क्यों?
हादसे की पहली बरसी पर पीड़ित परिवार आज भी इंसाफ और अंतिम जांच रिपोर्ट (Final Report) का इंतजार कर रहे हैं। एयरक्राफ्ट एक्सीडेंट इंवेस्टिगेशन ब्यूरो (AAIB) की शुरुआती रिपोर्ट में एक चौंकाने वाला खुलासा हुआ था: Air India AI 171 crash anniversary
- फ्यूल कट-ऑफ स्विच: टेकऑफ के सिर्फ 32 सेकंड बाद विमान के दोनों इंजनों का फ्यूल स्विच अचानक ‘RUN’ से ‘CUTOFF’ मोड पर चला गया था, जिससे इंजनों को ईंधन मिलना बंद हो गया।
- पायलट की गलती या तकनीकी खराबी?: कॉकपिट वॉयस रिकॉर्डर (CVR) की लीक हुई बातचीत के अनुसार, एक पायलट दूसरे से पूछ रहा था कि तुमने स्विच बंद क्यों किया? जिस पर दूसरे ने कहा कि उसने ऐसा नहीं किया।
- फ्लाइट सेफ्टी पर सवाल: जांच में यह भी सामने आया है कि कुछ बोइंग 787 विमानों के फ्यूल स्विच लॉक होने में दिक्कत आ रही थी। परिवार वाले आज भी एअर इंडिया और विमान निर्माता कंपनी से जवाब मांग रहे हैं कि उनके अपाचे की तरह उड़ने वाले इस आधुनिक विमान में इतनी बड़ी लापरवाही कैसे हुई?
उपसंहार: यादों में एअर इंडिया-171 के मासूम
Air India AI 171 crash anniversary: आज अहमदाबाद के उस बीजे मेडिकल कॉलेज हॉस्टल परिसर में सन्नाटा है, जहां एक साल पहले लाशें बिखरी पड़ी थीं। नवविवाहित जोड़े कमलेश और धूपबेन (जो पहली बार लंदन जा रहे थे) से लेकर कई युवा डॉक्टरों की याद में आज वहां मोमबत्तियां जलाई जा रही हैं।
समय बदल गया है, साल बदल गया है, लेकिन अहमदाबाद के इतिहास का यह काला दिन हमेशा याद दिलाता रहेगा कि कूटनीति और तकनीक की बड़ी-बड़ी बातों के बीच, इंसानी जान कितनी सस्ती और नाजुक होती है। भावभीनी श्रद्धांजलि!
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