Gen-Z का अनोखा विरोध: ‘Unemployed और Lazy’ होना है योग्यता! जानिए इंटरनेट पर वायरल हो रही ‘Cockroach Janta Party’
क्या है ‘Cockroach Janta Party’? महज 3 दिन में जुड़े 1 लाख से ज्यादा मेंबर्स, जानिए देश में क्यों छिड़ी इस पर बहस
सोशल मीडिया पर वायरल हो रही ‘कोकरोच जनता पार्टी’ (CJP) क्या है? जानिए सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस की एक टिप्पणी से शुरू हुए इस डिजिटल आंदोलन ने कैसे महज 3 दिनों में 1 लाख से ज्यादा बेरोजगार युवाओं को अपने साथ जोड़ लिया।
‘Cockroach Janta Party’ 🪳 “योग्यता: बेरोजगार, आलसी और सोशल मीडिया पर रेंट करने में एक्सपर्ट!” अजीब लग रहा है न? लेकिन इसी अनोखी मेंबरशिप क्राइटेरिया के साथ भारत में जन्म हुआ है ‘कोकरोच जनता पार्टी’ (CJP) का! इंटरनेट के एक मजाक ने अब देश में बेरोजगारी और युवाओं के गुस्से की आवाज का रूप ले लिया है। सिर्फ 3 दिन में 1 लाख मेंबर्स! आखिर क्या है इसके पीछे की पूरी इनसाइड स्टोरी?
क्या भारत में डिजिटल कूटनीति और राजनीतिक विरोध का स्वरूप बदल रहा है? 'कोकरोच जनता पार्टी' (CJP) का महज 72 घंटों में 1 लाख से अधिक मेंबर्स जुटाना इस बात का सबूत है कि Gen-Z अब अपने गुस्से को व्यक्त करने के लिए ट्रेडिशनल तरीकों की जगह हाइपर-आयरनिक सटायर (Hyper-ironic Satire) का इस्तेमाल कर रहा है। ब्रांड्स और पॉलिटिकल रणनीतिकारों के लिए यह सोशल मीडिया कल्ट बिल्डिंग का एक बड़ा केस स्टडी है।
तंज से पैदा हुई ‘Cockroach Janta Party’ (CJP), 3 दिन में 1 लाख मेंबर्स जोड़कर इंटरनेट पर मचाया तहलका!

भारत की राजनीति में हर दिन नए गठबंधन और पार्टियां बनती हैं, लेकिन इंटरनेट के दौर में एक ऐसी पार्टी का उदय हुआ है जिसने न तो कोई बड़ी रैली की और न ही करोड़ों रुपये खर्च किए, फिर भी महज तीन दिनों में एक लाख से ज्यादा युवाओं को अपना सदस्य बना लिया। इस पार्टी का नाम है— ‘कोकरोच जनता पार्टी’ (CJP)।
सुनने में यह किसी बड़े मजाक या मीम जैसा लगता है, लेकिन इसके पीछे देश के युवाओं की बेरोजगारी को लेकर छिपी गहरी कड़वाहट, गुस्सा और सिस्टम के खिलाफ एक अनोखा विरोध प्रदर्शन है। सोशल मीडिया पर एक्टिव रहने वाले युवाओं (Gen-Z) ने इस व्यंग्यात्मक नाम को अपना डिजिटल हथियार बना लिया है।
कैसे और कहां से हुई इस पार्टी की शुरुआत?
‘Cockroach Janta Party’ इस पूरी कहानी की शुरुआत 15 मई 2026 को सुप्रीम कोर्ट में एक मामले की सुनवाई के दौरान हुई। रिपोर्ट के मुताबिक, देश के मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत ने कोर्ट रूम में कुछ लोगों द्वारा की जाने वाली अनर्गल जनहित याचिकाओं (PILs) और सोशल मीडिया एक्टिविज्म की आलोचना करते हुए एक टिप्पणी की थी। उन्होंने कथित तौर पर कहा था:
“कुछ युवा कोकरोच की तरह होते हैं, जिन्हें कोई रोजगार या प्रोफेशन में जगह नहीं मिलती। उनमें से कुछ मीडिया बन जाते हैं, कुछ सोशल मीडिया या आरटीआई एक्टिविस्ट बन जाते हैं और हर किसी पर हमला करना शुरू कर देते हैं।”
इस बयान में इस्तेमाल किया गया शब्द “कोकरोच” सोशल मीडिया पर मौजूद देश के बेरोजगार और पढ़े-लिखे युवाओं को चुभ गया। इंटरनेट पर युवाओं ने इसे अपनी डिग्री और रोजगार न मिलने की मजबूरी का अपमान माना।
अभिजित दिपके का ‘मास्टरस्ट्रोक’ और अनोखी योग्यता
CJI की इस टिप्पणी के ठीक अगले दिन, यानी 16 मई को आम आदमी पार्टी (AAP) के पूर्व सोशल मीडिया रणनीतिकार अभिजित दिपके ने एक्स (ट्विटर) पर एक पोस्ट किया। उन्होंने लिखा कि वे देश के उन तमाम लोगों के लिए एक नया प्लेटफॉर्म शुरू कर रहे हैं जिन्हें सिस्टम “कोकरोच” समझता है। उन्होंने इसे नाम दिया—’कोकरोच जनता पार्टी’।

इस पार्टी का आधिकारिक मोटो रखा गया: “सेक्युलर, सोशलिस्ट, डेमोक्रेटिक, लेजी” (Secular, Socialist, Democratic, Lazy)। इसके साथ ही उन्होंने पार्टी में शामिल होने के लिए कुछ बेहद मजेदार और व्यंग्यात्मक शर्तें रखीं:
- व्यक्ति का बेरोजगार होना जरूरी है (चाहे मजबूरी से या अपनी मर्जी से)।
- वह शारीरिक रूप से आलसी (Lazy) होना चाहिए।
- वह ‘क्रॉनिकली ऑनलाइन’ (Chronically Online) हो, यानी दिन में कम से कम 11 घंटे फोन चलाता हो।
- उसमें किसी भी मुद्दे पर ‘प्रोफेशनल तरीके से भड़ास निकालने’ (Rant Professionally) की काबिलियत हो।
युवाओं को यह अनूठा अंदाज इतना पसंद आया कि पार्टी की वेबसाइट cockroachjantaparty.org लॉन्च होते ही क्रैश होने की कगार पर आ गई। देखते ही देखते शुरुआती 48 घंटों में 40 हजार और 3 दिनों के भीतर 1 लाख से ज्यादा लोगों ने इसकी सदस्यता ले ली। यहाँ तक कि तृणमूल कांग्रेस (TMC) की सांसद महुआ मोइत्रा और कीर्ति आजाद जैसे बड़े चेहरों ने भी सोशल मीडिया पर इस ट्रेंड का हिस्सा बनते हुए इसमें शामिल होने की इच्छा जताई।

गंभीर मुद्दों पर आधारित है इनका 5-पॉइंट मेनिफेस्टो
भले ही इस पार्टी की शुरुआत एक मजाक और मीम के तौर पर हुई हो, लेकिन इनका मेनिफेस्टो (घोषणापत्र) बेहद गंभीर और सीधे सिस्टम पर सवाल उठाने वाला है। इनके 5 प्रमुख मुद्दों में शामिल हैं: ‘Cockroach Janta Party’
- न्यायपालिका में पारदर्शिता: सेवानिवृत्ति (Retirement) के बाद किसी भी मुख्य न्यायाधीश को राज्यसभा सीट या कोई सरकारी इनाम न दिया जाए।
- चुनाव आयोग पर सख्ती: यदि किसी वैध मतदाता का नाम वोटर लिस्ट से डिलीट होता है, तो मुख्य चुनाव आयुक्त पर सख्त कार्रवाई हो।
- संसद में महिलाओं को 50% आरक्षण: बिना सीटों की संख्या बढ़ाए तत्काल महिलाओं को कैबिनेट और संसद में आधी हिस्सेदारी दी जाए।
- पेपर लीक और छात्रों के हक में आवाज: हालिया NEET परीक्षा विवाद और CBSE की री-चेकिंग फीस को ‘खुली लूट’ बताते हुए छात्रों को न्याय दिलाना।
- दलबदलू नेताओं पर बैन: चुनाव जीतने के बाद पार्टी बदलने वाले विधायकों और सांसदों पर 20 साल का चुनावी प्रतिबंध लगे।
CJI को देनी पड़ी सफाई
‘Cockroach Janta Party’ इस डिजिटल आंदोलन और युवाओं के भारी गुस्से को देखते हुए 16 मई को ही चीफ जस्टिस सूर्यकांत ने इस मामले पर अपनी सफाई पेश की। उन्होंने कहा कि उनके बयान को गलत संदर्भ में पेश किया गया है। वे देश के युवाओं का बेहद सम्मान करते हैं और उन्हें देश का भविष्य मानते हैं। उनका तंज केवल उन लोगों पर था जो फर्जी और बोगस डिग्रियों के सहारे वकालत या अन्य पेशों में घुसकर सिस्टम को बदनाम कर रहे हैं।
‘Cockroach Janta Party’ मीम से आंदोलन बनता कल्ट
एक्सपर्ट्स का मानना है कि ‘कोकरोच जनता पार्टी’ का इतनी तेजी से वायरल होना यह दिखाता है कि भारत का युवा वर्ग इस समय पेपर लीक, बेरोजगारी और आर्थिक असमानता जैसे मुद्दों से कितना परेशान है। जब युवाओं को लगता है कि मुख्यधारा की राजनीतिक पार्टियां उनकी बात नहीं सुन रहीं, तो वे इस तरह के ‘हाइपर-आयरनिक’ (Hyper-ironic) तरीकों से अपनी आवाज बुलंद करते हैं।
खबरें यह भी आ रही हैं कि यह डिजिटल पार्टी अब बिहार के बांकीपुर विधानसभा उपचुनाव में अपना पहला जमीनी उम्मीदवार उतारने की तैयारी कर रही है। यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या यह ‘कोकरोच’ बनकर शुरू हुआ सोशल मीडिया का मजाक वाकई में देश की चुनावी राजनीति की दिशा बदल पाता है या नहीं।
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