कौन हैं जनरल मनोज मुकुंद नरवणे? क्यों उनकी आत्मकथा ‘फोर स्टार्स ऑफ डेस्टिनी’ पर मचा है बवाल? General MM Naravane Autobiography Controversy
General MM Naravane Autobiography Controversy पूर्व थल सेना प्रमुख जनरल एम.एम. नरवणे की अप्रकाशित आत्मकथा ‘फोर स्टार्स ऑफ डेस्टिनी’ विवादों में है। जानें अग्निपथ योजना और लद्दाख गतिरोध पर उनके वो खुलासे जो चर्चा का विषय बने हुए हैं।
भारतीय सेना के पूर्व प्रमुख जनरल एम.एम. नरवणे की आत्मकथा ‘Four Stars of Destiny’ रिलीज से पहले ही विवादों के घेरे में है। अग्निपथ योजना की शुरुआत और लद्दाख में चीन के साथ गतिरोध पर किए गए खुलासों ने हलचल मचा दी है। आखिर क्या है इस किताब के पन्नों में? पूरी कहानी यहाँ पढ़ें।
कौन हैं जनरल नरवणे और क्यों उनकी किताब पर मचा है विवाद?
भूमिका भारतीय सेना के 28वें थल सेना प्रमुख जनरल मनोज मुकुंद नरवणे (General M.M. Naravane) एक बार फिर सुर्खियों में हैं। इस बार वजह कोई सैन्य अभियान नहीं, बल्कि उनकी आत्मकथा ‘फोर स्टार्स ऑफ डेस्टिनी’ (Four Stars of Destiny) है। यह किताब अभी तक बाजार में नहीं आई है, लेकिन इसके कुछ अंशों ने रक्षा और राजनीतिक गलियारों में तूफान खड़ा कर दिया है।
कौन हैं जनरल एम.एम. नरवणे? General MM Naravane Autobiography Controversy
जनरल मनोज मुकुंद नरवणे ने दिसंबर 2019 से अप्रैल 2022 तक भारतीय सेना के प्रमुख के रूप में कार्य किया। उनके कार्यकाल को भारतीय सैन्य इतिहास के सबसे चुनौतीपूर्ण समयों में से एक माना जाता है। उनके नेतृत्व में ही भारतीय सेना ने पूर्वी लद्दाख में चीन की पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (PLA) के साथ ‘गलवान संघर्ष’ और पैंगोंग त्सो झील के पास भारी तनाव का सामना किया था। वह अपनी शांत कार्यशैली और रणनीतिक कौशल के लिए जाने जाते हैं।


विवाद की मुख्य जड़: अग्निपथ योजना और लद्दाख गतिरोध
जनरल नरवणे की आत्मकथा के कुछ अंश करीब तीन साल पहले और हाल ही में कुछ मीडिया संस्थानों द्वारा प्रकाशित किए गए थे। विवाद मुख्य रूप से दो बिंदुओं पर केंद्रित है: General MM Naravane Autobiography Controversy
1. अग्निपथ योजना (Agnipath Scheme): किताब के लीक हुए अंशों के अनुसार, जनरल नरवणे ने दावा किया है कि ‘अग्निपथ योजना’ सेना के लिए एक “आश्चर्य” (Surprise) की तरह थी। उन्होंने लिखा है कि सेना ने केवल ‘टूर ऑफ ड्यूटी’ का प्रस्ताव दिया था, जो बहुत छोटे स्तर पर था। लेकिन सरकार ने इसे व्यापक रूप से ‘अग्निपथ’ के रूप में लागू कर दिया। विपक्षी दल इस हिस्से को लेकर सरकार पर निशाना साध रहे हैं कि क्या सेना इस बड़े बदलाव के लिए पूरी तरह तैयार थी?
2. चीन के साथ सैन्य गतिरोध: किताब में अगस्त 2020 की उस रात का भी विवरण है, जब कैलाश रेंज में भारतीय और चीनी सैनिक आमने-सामने थे। नरवणे ने लिखा है कि उस वक्त तनाव इतना अधिक था कि युद्ध छिड़ने की पूरी संभावना थी। उनके द्वारा रक्षा मंत्री को किए गए फोन कॉल्स और ग्राउंड कमांडरों को दिए गए निर्देशों का विवरण इस आत्मकथा में है, जो राष्ट्रीय सुरक्षा के लिहाज से बेहद संवेदनशील माना जा रहा है।
प्रकाशन पर रोक और वर्तमान स्थिति
रक्षा मंत्रालय और सुरक्षा एजेंसियों ने किताब के प्रकाशन पर फिलहाल रोक लगा रखी है। नियम के मुताबिक, सेना के उच्च अधिकारियों को अपनी सेवा से जुड़ी संवेदनशील जानकारी साझा करने से पहले ‘क्लीयरेंस’ लेनी होती है। रक्षा मंत्रालय इसकी समीक्षा कर रहा है कि कहीं इसमें ऐसी कोई जानकारी तो नहीं है जो ‘ऑफिशियल सीक्रेट्स एक्ट’ का उल्लंघन करती हो।
अखबारों में छपे अंश और जनमत General MM Naravane Autobiography Controversy
दिलचस्प बात यह है कि किताब के कई महत्वपूर्ण हिस्से पहले ही अलग-अलग अखबारों और न्यूज पोर्टल्स में रिव्यू के तौर पर छप चुके हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि जब जानकारी पहले ही पब्लिक डोमेन में आ चुकी है, तो प्रकाशन रोकना केवल विवाद को हवा देना है। वहीं, कुछ का तर्क है कि एक पूर्व सेना प्रमुख का सार्वजनिक रूप से सरकार की नीतियों (जैसे अग्निपथ) पर सवाल उठाना अनुशासन के खिलाफ हो सकता है।
जनरल नरवणे का करियर बेदाग रहा है, लेकिन उनकी यह किताब उनकी विरासत के साथ एक नया अध्याय जोड़ रही है। ‘फोर स्टार्स ऑफ डेस्टिनी’ केवल एक संस्मरण नहीं, बल्कि आधुनिक भारत के सबसे महत्वपूर्ण सैन्य निर्णयों का एक दस्तावेज है। अब देखना यह है कि क्या रक्षा मंत्रालय इसे कुछ बदलावों के साथ अनुमति देता है या यह किताब ठंडे बस्ते में चली जाएगी।
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