Italy Israel Defence Deal: इजरायल को सबसे करीबी दोस्त ने दिया झटका! इटली ने सस्पेंड किया रक्षा समझौता, नेतन्याहू पर क्यों भड़कीं मेलोनी?
Italy Israel Defence Deal: ईरान के साथ युद्ध की आहट के बीच इजरायल को इटली से बड़ा झटका लगा है। जॉर्जिया मेलोनी ने इजरायल के साथ डिफेंस डील सस्पेंड की। जानें क्या है इसके पीछे की वजह और मेलोनी-नेतन्याहू के रिश्तों में आई खटास। यह एक बड़ी भू-राजनीतिक हलचल है, जहाँ मध्य पूर्व के तनाव ने अब यूरोपीय कूटनीति को भी हिलाकर रख दिया है। विशेष रूप से इजरायल और इटली के बीच के रिश्तों में यह कड़वाहट वैश्विक चर्चा का विषय है।
दोस्ती में दरार! इजरायल के सबसे बड़े यूरोपीय समर्थकों में से एक इटली ने रक्षा आपूर्ति रोकी।
क्या नेतन्याहू अकेले पड़ रहे हैं?

Italy Israel Defence Deal
इजरायल और इटली के बीच रक्षा दरार

कूटनीतिक गलियारों में हलचल
मध्य पूर्व में जारी संघर्ष ने न केवल क्षेत्रीय सीमाओं को प्रभावित किया है, बल्कि उन वैश्विक साझेदारियों को भी चुनौती दी है जो कभी अटूट मानी जाती थीं। इजरायल के लिए एक बड़ा झटका यूरोपीय देश इटली की ओर से आया है। इटली की प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी, जिन्हें बेंजामिन नेतन्याहू का एक मजबूत सहयोगी माना जाता था, उन्होंने अब इजरायल के साथ चल रहे रक्षा समझौतों को सस्पेंड करने का कड़ा फैसला लिया है।
क्या है इटली का बड़ा फैसला?
Italy Israel Defence Deal इटली सरकार ने स्पष्ट किया है कि वह इजरायल को हथियारों और सैन्य उपकरणों के निर्यात पर रोक लगा रही है। रिपोर्टों के अनुसार, इटली ने अक्टूबर 2023 से ही नई लाइसेंसिंग प्रक्रिया को सीमित कर दिया था, लेकिन अब मौजूदा समझौतों और आपूर्ति श्रृंखलाओं पर भी “सस्पेंशन” की तलवार लटक गई है। इटली का तर्क है कि उनके कानून (कानून 185/1990) उन देशों को हथियार निर्यात करने से मना करते हैं जो सशस्त्र संघर्ष में शामिल हैं या जहाँ मानवाधिकारों का उल्लंघन हो रहा है।
मेलोनी और नेतन्याहू के बीच तनाव की वजह क्या है?

जॉर्जिया मेलोनी और बेंजामिन नेतन्याहू के बीच वैचारिक समानता के बावजूद, तीन मुख्य कारणों ने मेलोनी को भड़कने पर मजबूर किया है: Italy Israel Defence Deal
- लेबनान में UNIFIL पर हमला: हाल के समय में दक्षिणी लेबनान में संयुक्त राष्ट्र शांति सेना (UNIFIL) के ठिकानों पर इजरायली हमले हुए हैं। इटली इस शांति सेना में सबसे बड़े योगदानकर्ताओं में से एक है। मेलोनी ने संसद में साफ कहा कि यह हमला “अस्वीकार्य” है।
- गज़ा में मानवीय संकट: इटली पर घरेलू और यूरोपीय संघ (EU) का भारी दबाव है कि वह गज़ा में बढ़ती मौतों और भुखमरी के बीच अपनी सैन्य सहायता रोक दे।
- ईरान युद्ध का खतरा: इटली का मानना है कि यदि संघर्ष ईरान के साथ सीधे युद्ध में बदलता है, तो हथियार आपूर्ति करना आग में घी डालने जैसा होगा, जिससे पूरा यूरोप प्रभावित हो सकता है।
इजरायल के लिए यह कितना बड़ा नुकसान?
इजरायल के पास अमेरिका और जर्मनी जैसे बड़े आपूर्तिकर्ता हैं, लेकिन इटली की भूमिका तकनीकी रूप से महत्वपूर्ण है।
- सॉफ्टवेयर और स्पेयर पार्ट्स: इजरायल के कई विमानों और सैन्य वाहनों के महत्वपूर्ण कलपुर्जे और सॉफ्टवेयर इटली से आते हैं।
- राजनीतिक अलगाव: इटली का पीछे हटना इजरायल के लिए प्रतीकात्मक रूप से बड़ी हार है। मेलोनी का रुख यह दिखाता है कि इजरायल के सबसे करीबी दोस्त भी अब उसके सैन्य अभियानों की शैली से असहमत हो रहे हैं।
ईरान युद्ध के बीच ‘बैकस्टैब’ या मजबूरी?
एक तरफ जहाँ ईरान और उसके प्रॉक्सी संगठन इजरायल पर दबाव बना रहे हैं, वहीं यूरोपीय देशों का हाथ खींचना नेतन्याहू सरकार को रणनीतिक रूप से कमजोर कर सकता है। इजरायल इसे एक “झटके” के रूप में देख रहा है, जबकि इटली इसे अपनी अंतरराष्ट्रीय शांति नीतियों और अपने सैनिकों (UNIFIL) की सुरक्षा के प्रति जिम्मेदारी बता रहा है।
वैश्विक प्रभाव Italy Israel Defence Deal
इटली के इस फैसले से यूरोप के अन्य देशों, जैसे स्पेन और फ्रांस पर भी दबाव बढ़ेगा कि वे इजरायल को दी जाने वाली सैन्य सहायता पर पुनर्विचार करें। इससे न केवल इजरायल की युद्ध क्षमता बल्कि उसकी रक्षा अर्थव्यवस्था पर भी दीर्घकालिक प्रभाव पड़ सकता है।
इजरायल और इटली के बीच यह रक्षा तनाव इस बात का संकेत है कि युद्ध अब केवल सीमाओं पर नहीं, बल्कि बंद कमरों की डिप्लोमेसी में भी लड़ा जा रहा है। जॉर्जिया मेलोनी का यह रुख नेतन्याहू के लिए एक चेतावनी है कि अब युद्ध खत्म करने का अंतरराष्ट्रीय दबाव अपने चरम पर पहुँच चुका है।
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