Lazy Eye or Squinting : बच्चों में ‘लेजी आई’ और आँखों का भेंगापन: क्या हैं इसके लक्षण और कैसे बचाएं अपने बच्चे की रोशनी?
Lazy Eye or Squinting : क्या आपका बच्चा टीवी देखते समय आँखें सिकोड़ता है? जानें बच्चों में Lazy Eye (Amblyopia) और Squinting के कारण, लक्षण और बचाव के प्रभावी तरीके। पेरेंट्स के लिए एक संपूर्ण गाइड।
बच्चों के स्वास्थ्य और विकास को लेकर आपकी चिंता और इस विषय पर जानकारी फैलाने का आपका प्रयास सराहनीय है। विशेष रूप से एक माता-पिता के रूप में, आँखों से जुड़ी इन बारीकियों को समझना बहुत जरूरी है। डिजिटल युग में बच्चों की आँखों की सुरक्षा है सबसे जरूरी।
क्या आपका बच्चा तिरछा देखता है या आँखें सिकोड़ता है? इसे नजरअंदाज न करें, यह ‘लेजी आई’ का संकेत हो सकता है।

बच्चों में लेजी आई (Amblyopia) और आँखों का सिकोड़ना
आँखों की सेहत और बचपन Lazy Eye or Squinting
अक्सर माता-पिता यह नोटिस करते हैं कि उनका बच्चा मोबाइल देखते समय आँखें बहुत ज्यादा सिकोड़ता है या किसी चीज को देखने के लिए सिर को तिरछा करता है। कई बार इसे केवल एक आदत मानकर छोड़ दिया जाता है, लेकिन मेडिकल भाषा में यह Amblyopia (लेजी आई) या Strabismus (भेंगापन) का शुरुआती संकेत हो सकता है। अगर शुरुआती सालों (8-9 साल की उम्र तक) में इसका पता न चले, तो यह दृष्टि को स्थायी रूप से कमजोर कर सकता है।

1. लेजी आई (Lazy Eye/Amblyopia) क्या है?
लेजी आई का मतलब यह नहीं है कि आँख “आलसी” है, बल्कि इसका मतलब है कि दिमाग और उस आँख के बीच का तालमेल ठीक नहीं है।
- इसमें एक आँख की दृष्टि दूसरी आँख की तुलना में बहुत कमजोर हो जाती है।
- दिमाग कमजोर आँख से मिलने वाले संकेतों को नजरअंदाज करना शुरू कर देता है और केवल “अच्छी आँख” पर निर्भर हो जाता है।
- नतीजतन, कमजोर आँख का विकास रुक जाता है।
2. आई स्क्वैटिंग या भेंगापन (Squinting/Strabismus) क्या है?
इसे आम भाषा में ‘भेंगापन’ कहते हैं। इसमें दोनों आँखें एक ही दिशा में नहीं देखतीं।
- एक आँख सीधी देख रही होती है, जबकि दूसरी आँख अंदर, बाहर, ऊपर या नीचे की ओर झुकी हो सकती है।
- बच्चे अक्सर स्पष्ट देखने के लिए अपनी आँखों को सिकोड़ते हैं (Squinting), ताकि धुंधलापन कम हो सके।

3. यह क्यों होता है? (प्रमुख कारण)
बच्चों में इन समस्याओं के पीछे कई कारण हो सकते हैं:
- अपवर्तक दोष (Refractive Errors): यदि एक आँख में चश्मे का नंबर (Near or Farsightedness) ज्यादा है और दूसरी में कम, तो दिमाग धुंधली छवि वाली आँख को छोड़ देता है।
- मांसपेशियों का असंतुलन: आँखों को घुमाने वाली मांसपेशियों में कमजोरी होने के कारण आँखें सही दिशा में नहीं टिक पातीं।
- मोतियाबिंद (Cataract): कुछ बच्चों में जन्मजात मोतियाबिंद हो सकता है, जो रोशनी को अंदर जाने से रोकता है।
- आनुवंशिकता: अगर परिवार में पहले किसी को यह समस्या रही हो, तो बच्चों में इसके चांस बढ़ जाते हैं।
4. पहचान कैसे करें? (लक्षण) Lazy Eye or Squinting
चूंकि छोटे बच्चे खुद नहीं बता पाते कि उन्हें कम दिख रहा है, इसलिए माता-पिता को इन संकेतों पर ध्यान देना चाहिए:
- चीजों को देखने के लिए सिर को एक तरफ झुकाना।
- एक आँख को बंद करके या सिकोड़कर देखना।
- अक्सर आँखों को मलना या आँखों से पानी आना।
- गहराई का अंदाजा न लगा पाना (जैसे सीढ़ियों पर लड़खड़ाना या पास रखी चीज न पकड़ पाना)।
- पढ़ते समय बार-बार लाइन खो देना।

5. इससे कैसे बचें और क्या है इलाज?
अच्छी खबर यह है कि यदि 7 से 8 साल की उम्र से पहले इसका पता चल जाए, तो इसे पूरी तरह ठीक किया जा सकता है।
- नियमित जाँच: बच्चे के 6 महीने के होने पर और फिर स्कूल जाने से पहले कम से कम एक बार विस्तृत आई चेकअप जरूर करवाएं।
- पैचिंग थेरेपी (Patching): इसमें “अच्छी आँख” पर कुछ घंटों के लिए पैच (पट्टी) लगा दी जाती है, ताकि दिमाग मजबूर होकर “लेजी आई” का उपयोग करे। यह सबसे प्रभावी तरीका है।
- चश्मा: यदि समस्या चश्मे के नंबर की वजह से है, तो सही नंबर का चश्मा लगाने से धीरे-धीरे आँखें संरेखित हो जाती हैं।
- आई ड्रॉप्स: कुछ मामलों में अच्छी आँख में विशेष ड्रॉप्स डाली जाती हैं जिससे वह थोड़ी धुंधली हो जाए और लेजी आई को काम करना पड़े।
- सर्जरी: यदि मांसपेशियों की कमजोरी ज्यादा है, तो सर्जरी के जरिए आँखों की पोजीशन को ठीक किया जाता है।
6. डिजिटल युग में विशेष सावधानी
आजकल बच्चे मोबाइल और टैबलेट पर बहुत समय बिताते हैं। इससे ‘स्यूडो-स्ट्रैबिस्मस’ (आभासी भेंगापन) या आँखों में तनाव बढ़ सकता है। 20-20-20 का नियम अपनाएं: हर 20 मिनट के स्क्रीन टाइम के बाद, 20 फीट दूर किसी चीज को 20 सेकंड तक देखें।

बच्चों की आँखें उनके भविष्य की खिड़की हैं। ‘लेजी आई’ या आँखों का सिकोड़ना केवल एक शारीरिक समस्या नहीं है, बल्कि यह बच्चे के सीखने की क्षमता और आत्मविश्वास को भी प्रभावित करता है। यदि आप अपने बच्चे में थोड़े भी असामान्य लक्षण देखें, तो तुरंत किसी पीडियाट्रिक ऑप्थल्मोलॉजिस्ट (बच्चों के आँख विशेषज्ञ) से मिलें। समय पर लिया गया एक छोटा सा कदम आपके बच्चे की पूरी दुनिया रोशन कर सकता है।
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