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Raghav Chadha joins BJP: राघव चड्ढा ने छोड़ी AAP, 6 अन्य सांसदों के साथ थामा BJP का दामन; अरविंद केजरीवाल के लिए अब तक का सबसे बड़ा झटका

Raghav Chadha joins BJP: राघव चड्ढा ने छोड़ी AAP, 6 अन्य सांसदों के साथ थामा BJP का दामन; अरविंद केजरीवाल के लिए अब तक का सबसे बड़ा झटका

Raghav Chadha joins BJP: आम आदमी पार्टी को लगा बड़ा झटका! राघव चड्ढा ने 6 अन्य राज्यसभा सांसदों के साथ भाजपा में शामिल होने का एलान किया। जानें कौन हैं वो सांसद और राघव चड्ढा ने क्यों कहा— “I am the right man in the wrong party.”

भारतीय राजनीति का बड़ा धमाका

भारतीय राजनीति में आज (24 अप्रैल 2026) उस समय हड़कंप मच गया जब आम आदमी पार्टी (AAP) के सबसे चर्चित चेहरों में से एक, राघव चड्ढा ने पार्टी से इस्तीफा दे दिया। यह केवल एक व्यक्तिगत इस्तीफा नहीं था, बल्कि अरविंद केजरीवाल की सत्ता के लिए एक बहुत बड़ा “शॉकर” था। राघव चड्ढा ने अकेले पार्टी नहीं छोड़ी, बल्कि उन्होंने राज्यसभा के 6 अन्य सांसदों के साथ भारतीय जनता पार्टी (BJP) में शामिल होने का एलान कर दिया। इस घटनाक्रम ने दिल्ली से लेकर पंजाब तक की सियासत में भूचाल ला दिया है।

Raghav Chadha joins BJP कैसे हुआ यह विद्रोह? (The Big Split)

शुक्रवार दोपहर एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में राघव चड्ढा ने संदीप पाठक और अशोक मित्तल के साथ आकर यह घोषणा की कि वे आम आदमी पार्टी से नाता तोड़ रहे हैं। चड्ढा ने दावा किया कि राज्यसभा में AAP के कुल 10 सांसदों में से 7 सांसद (यानी दो-तिहाई बहुमत) अब भाजपा के साथ जा रहे हैं।

Raghav Chadha joins BJP
Raghav Chadha joins BJP

भाजपा में शामिल होने वाले प्रमुख नाम:

  1. राघव चड्ढा
  2. संदीप पाठक (AAP के रणनीतिकार)
  3. अशोक मित्तल
  4. हरभजन सिंह (पूर्व क्रिकेटर)
  5. स्वाति मालीवाल (पूर्व DCW प्रमुख)
  6. राजेंद्र गुप्ता
  7. विक्रमजीत सिंह साहनी

Raghav Chadha joins BJP दलबदल विरोधी कानून (Anti-Defection Law) से बचने के लिए दो-तिहाई बहुमत की यह संख्या बेहद महत्वपूर्ण है, क्योंकि इस स्थिति में उनकी सदस्यता पर खतरा नहीं आएगा।

“गलत पार्टी में सही आदमी” – चड्ढा का छलका दर्द

प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान राघव चड्ढा भावुक भी नजर आए और हमलावर भी। उन्होंने कहा, “मैंने अपनी जवानी के 15 साल इस पार्टी को सींचने में लगा दिए। लेकिन आज मुझे यह महसूस हो रहा है कि मैं एक गलत संगठन में सही व्यक्ति था। AAP अपने मूल सिद्धांतों और भ्रष्टाचार विरोधी विचारधारा से पूरी तरह भटक गई है।”

चड्ढा ने आरोप लगाया कि पार्टी अब केवल व्यक्तिगत लाभ के लिए काम कर रही है और राष्ट्रीय हित को पीछे छोड़ दिया गया है। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व की तारीफ करते हुए कहा कि वे भारत को वैश्विक मंच पर मजबूत बनाने के मिशन में अपना योगदान देना चाहते हैं।

अरविंद केजरीवाल और AAP की प्रतिक्रिया

इस खबर के बाद आम आदमी पार्टी के खेमे में सन्नाटा पसर गया है। पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘X’ पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए कहा— “बीजेपी ने एक बार फिर पंजाबियों के साथ धक्का (धोखा) किया है।”

Raghav Chadha joins BJP
Raghav Chadha joins BJP

AAP के अन्य नेताओं ने इसे “ऑपरेशन लोटस” का हिस्सा बताते हुए कहा कि जो लोग संघर्ष नहीं कर सकते, वे डरकर भाजपा की गोद में जा रहे हैं। हालांकि, राघव चड्ढा का जाना पार्टी के लिए एक ऐसा नुकसान है जिसकी भरपाई करना फिलहाल असंभव लग रहा है, क्योंकि चड्ढा न केवल दिल्ली बल्कि पंजाब में भी पार्टी का बड़ा चेहरा थे।

विद्रोह की पटकथा कब लिखी गई?

Raghav Chadha joins BJP राजनैतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस विद्रोह की नींव कुछ हफ्ते पहले ही पड़ गई थी जब AAP ने राघव चड्ढा को राज्यसभा में पार्टी के उप-नेता (Deputy Leader) के पद से हटा दिया था और उनकी जगह अशोक मित्तल को जिम्मेदारी दी थी। चड्ढा ने उस समय “Silenced but not defeated” (खामोश लेकिन पराजित नहीं) लिखकर अपनी नाराजगी जाहिर की थी। साथ ही, दिल्ली शराब नीति मामले में पार्टी के रुख और आंतरिक फैसलों में खुद को नजरअंदाज किए जाने से वे आहत थे।

AAP के लिए इसके क्या मायने हैं?

राज्यसभा में सांसदों के इस बड़े दलबदल का असर सीधे तौर पर पार्टी की राष्ट्रीय छवि पर पड़ेगा।

  • संसद में कमजोर स्थिति: राज्यसभा में अब AAP की ताकत नगण्य रह जाएगी।
  • संगठनात्मक संकट: संदीप पाठक जैसे रणनीतिकार का जाना पार्टी के लिए सबसे बड़ी संगठनात्मक क्षति है।
  • आगामी चुनाव: दिल्ली और अन्य राज्यों में होने वाले चुनावों में भाजपा अब इस मुद्दे को भुनाएगी कि “केजरीवाल के अपने ही उनका साथ छोड़ रहे हैं।”

एक नए राजनैतिक सफर की शुरुआत

राघव चड्ढा का भाजपा में जाना 2026 की सबसे बड़ी राजनैतिक घटना मानी जा रही है। जहां भाजपा इसे मोदी लहर का प्रभाव बता रही है, वहीं आम आदमी पार्टी के लिए यह आत्ममंथन का समय है। क्या अरविंद केजरीवाल अपनी बिखरती पार्टी को बचा पाएंगे या यह सिलसिला अभी और आगे बढ़ेगा? यह आने वाला वक्त ही बताएगा।



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